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आधा दर्जन चेकपोस्ट बनाने के बाद भी पूरी तरह नहीं रुक पाया अवैध खनन

Mon, 24 May 2021 01:37 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला नेटवर्क, शिमला

सार

हर रोज कम से कम एक हजार गाड़ियां रेत और बजरी लेकर जा रही हैं। जिन रास्तों में चेक पोस्ट की सिफारिश की थी, वहां नहीं लगाई गई। 10 से 15 टन तक गाड़ी में खनिज ले जा सकते हैं, लेकिन 50 टन तक खनिज गाड़ियों में ले जाया जा रहा है।
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अवैध खनन- सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उद्योग विभाग की ओर से स्थापित चेकपोस्टों से भी अवैध खनन पूरी तरह नहीं रुक पाया है। प्रदेश के ऊना और सोलन जिलों में प्राथमिकता पर आधा दर्जन चेकपोस्टें स्थापित की गई हैं। बावजूद इसके खनन माफिया चोर रास्तों से बड़ी मात्रा में खनिज की तस्करी कर रहा है।  

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चार जिलों ऊना, सोलन, सिरमौर और कांगड़ा से पड़ोसी राज्यों में अवैध तरीके से खनिज का गोरखधंधा सबसे ज्यादा पनप रहा है। खनन माफिया राज्य के प्राकृतिक संसाधनों का अवैज्ञानिक तरीके से दोहन करता रहा है। साथ ही सरकार के खजाने को हर साल करोड़ों की आर्थिक चपत लगती है। 

नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि जिन रास्तों से खनिज ले जाने वाली गाड़ियां गुजरती नहीं हैं, वहां ये चेकपोस्टें स्थापित कर रखी हैं। पंजाब, हरियाणा और दिल्ली तक प्रदेश के खनिज अवैध रूप से भेजा जा रहा है। हर रोज कम से कम एक हजार गाड़ियां रेत और बजरी लेकर जा रही हैं।
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जिन रास्तों में चेक पोस्ट की सिफारिश की थी, वहां नहीं लगाई गई। 10 से 15 टन तक गाड़ी में खनिज ले जा सकते हैं, लेकिन 50 टन तक खनिज गाड़ियों में ले जाया जा रहा है। स्वां नदी में खनिज दोहन के लिए जेसीबी से खुदाई की जा रही है। प्रशासन चाहे तो कुछ ही घंटों में खनन माफिया पर नकेल कस सकता है और करोड़ों की चोरी भी रुक जाएगी। 

राज्य जियोलॉजिस्ट पुनीत गुलेरिया कहते हैं कि छह चेकपोस्ट स्थापित होने के बाद कई मामले पकड़े गए हैं और उनको जुर्माना भी किया गया है। चेक पोस्ट बनने से खनन माफिया पर दबाव भी बना है।

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