हिमाचल में भाजपा की सियासत का लावा फिर भड़क रहा है। पहले से ही चल रही धींगामुश्ती के बीच कुछ दिन पहले यहां केंद्रीय वित्त एवं कारपोरेट राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर के बयान से हलचल हुई। उसके बाद अब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा की कड़ी नसीहतों के कई मायने निकाले जा रहे हैं। कई दिनों से जिस तरह के घटनाक्रम भाजपा के अंदर हो रहे हैं, वे सामान्य नहीं हैं।
हालांकि, भाजपा के हितैषी इन्हें नजरअंदाज करने की कोशिश भी करते रहते हैं। कुछ हफ्ते पहले भाजपा के ज्वालामुखी मंडल को भंग किया गया तो पूर्व मंत्री और विधायक रमेश ध्वाला ने मुख्यमंत्री के सामने संगठन के कुछ लोगों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। दूसरी ओर ज्वालामुखी में संगठन महामंत्री पवन राणा के समर्थक विधायक के खिलाफ सड़कों पर उतरने लग गए। उसके बाद नड्डा ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को अचानक नई दिल्ली बुला लिया।
बिहार चुनाव में नड्डा की व्यस्तता के कारण जयराम को उनसे मिलने के लिए कुछ इंतजार तक करना पड़ा। फिर डाडासीबा में हुई रैली में अनुराग ने केंद्रीय विश्वविद्यालय के लिए भूमि अधिग्रहण के मामले में सरकार की कार्यशैली पर ही सवाल उठा दिए। इस पर जयराम ने भी उनकी केंद्र में भूमिका को याद करवाया। यह वाकयुद्ध दूसरे दिन भी जारी रहा, जब जयराम ने अनुराग को तकनीकी जानकारी नहीं होने और उनके सार्वजनिक मंच पर ऐसी बातें करने पर सवाल उठाया।
इस घमासान के बाद हाईकमान ने हस्तक्षेप किया तो अनुराग ने जयराम का इस बारे में कार्रवाई के लिए आभार जताया और इसे ट्वीट कर अपने सुर बदल दिए। बिहार की विजय पताका लहराते हुए शनिवार को नड्डा बिलासपुर आए तो उन्होंने भी सत्ता को संभालने की ताकत बनाए रखने की नसीहत कार्यकर्ताओं को मंच से दे डाली। इसे भी कहीं तीर कहीं निशाने के रूप में देखा जा रहा है।
नड्डा ने अधीर न होने की चेतावनी तक दे डाली। नड्डा के इस स्वागत मंच से मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का नहीं बोलना भी सामान्य तरीके से नहीं लिया जा रहा है। हालांकि, इस बारे में दलील दी जा रही है कि कार्यक्रम ही संक्षिप्त था तो इसलिए केवल नड्डा ही बोले। ऐसे में कह सकते हैं कि पिछले कुछ दिनों से जिस तरह की घटनाएं भाजपा में हो रही हैं, वे सरकार और संगठन की मिशन रिपीट के लिए सेहत या तो दुरुस्त कर देगी या फिर यह भविष्य के किसी बड़े भूचाल का भी अंदेशा मानी जा रही हैं।