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Himachal News: मेडिकल भांग की खेती होगी सस्ती, सरकार घटाएगी लाइसेंस फीस; किसानों को मिलेगी राहत

Mon, 17 Aug 2026 09:48 AM IST
Ankesh Dogra अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

हिमाचल प्रदेश में मेडिकल उपयोग के लिए नियंत्रित भांग की खेती और उससे जुड़े उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए लाइसेंस शुल्क घटाने की तैयारी है। मौजूदा प्रस्ताव में खेती के लिए प्रति बीघा तीन लाख रुपये और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के लिए दो करोड़ रुपये सालाना शुल्क रखा गया है। सरकार को सुझाव मिले हैं कि इतनी ऊंची दरों से किसान और निवेशक पीछे हट सकते हैं। अब आबकारी एवं कर विभाग शुल्क संरचना की समीक्षा कर रहा है।
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भांग की खेती। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश में मेडिकल उपयोग के लिए भांग की खेती और उससे जुड़े उद्योगों का रास्ता आसान बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य सरकार मेडिकल भांग की नियंत्रित खेती के लिए प्रस्तावित लाइसेंस शुल्क में राहत देने जा रही है। खेती के लिए प्रति बीघा तीन लाख रुपये और प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने के लिए दो करोड़ रुपये वार्षिक लाइसेंस शुल्क तय किए जाने के बाद सरकार को विभिन्न स्तरों से सुझाव मिले हैं कि इतनी ऊंची दरें किसानों और निवेशकों को हतोत्साहित कर सकती हैं। 

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ऐसे में आबकारी एवं कर विभाग ने शुल्क संरचना की समीक्षा शुरू कर दी है। सरकार का मानना है कि मेडिकल भांग परियोजना को सफल बनाने के लिए ऐसी लाइसेंस व्यवस्था जरूरी है, जिसमें छोटे और मध्यम स्तर के किसान भी भागीदारी कर सकें और निजी क्षेत्र निवेश के लिए आगे आए। इसी उद्देश्य से विभाग नई शुल्क दरों का खाका तैयार कर रहा है।  संशोधित प्रस्ताव जल्द सरकार के समक्ष रखा जा सकता है।

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राज्य सरकार ने मेडिकल भांग की खेती, भंडारण, परिवहन और प्रसंस्करण के लिए विस्तृत नियामक ढांचा तैयार किया है। इसके तहत भांग का उपयोग केवल औषधीय, वैज्ञानिक अनुसंधान और औद्योगिक कार्यों तक सीमित रहेगा। नशे के उद्देश्य से उत्पादन, व्यापार या उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। मौजूदा प्रस्ताव के अनुसार मेडिकल भांग की खेती के लिए किसानों को कल्टीवेटर लाइसेंस लेना होगा, जिसके लिए प्रति बीघा तीन लाख रुपये वार्षिक शुल्क निर्धारित किया गया है। वहीं खेती और मैन्युफैक्चरिंग दोनों गतिविधियां संचालित करने वाली कंपनियों के लिए प्रति बीघा 10 लाख रुपये शुल्क का प्रावधान रखा गया है। 

भांग आधारित दवाओं, अर्क और अन्य अनुमोदित उत्पादों के निर्माण के लिए मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा, जिसके लिए दो करोड़ रुपये वार्षिक शुल्क प्रस्तावित है। 
सरकार अब इन दरों को कम कर परियोजना को अधिक व्यवहारिक और निवेश अनुकूल बनाने पर  विचार कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि अंतिम शुल्क संरचना तय करते समय किसानों, उद्योग जगत और विशेषज्ञों की राय को भी ध्यान में रखा जाएगा। 
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