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हिमाचल: भांग-अफीम की अवैध खेती पर तकनीकी शिकंजा, अब जियो टैगिंग से तुरंत होगी पहचान

Mon, 05 Oct 2026 12:12 PM IST
Ankesh Dogra अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

हिमाचल प्रदेश में अवैध भांग और अफीम की खेती पर निगरानी के लिए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने जियो टैगिंग शुरू कर दी है। जीपीएस के माध्यम से खेती वाले स्थानों की सटीक लोकेशन, अक्षांश-देशांतर, फोटो और वीडियो डिजिटल रिकॉर्ड में सुरक्षित किए जाएंगे। इससे पहले कार्रवाई किए गए स्थानों पर दोबारा निगरानी करना आसान होगा और जांच एजेंसियों को मजबूत डिजिटल साक्ष्य मिल सकेंगे।
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भांग की खेती। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश में भांग और अफीम की अवैध खेती पर अब तकनीक के जरिये शिकंजा कसने की तैयारी है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने प्रदेश में नशे की खेती वाले इलाकों की जियो टैगिंग शुरू कर दी है। इसके तहत अवैध खेती वाले प्रत्येक चिह्नित स्थान की सटीक लोकेशन जीपीएस के माध्यम से दर्ज की जाएगी। इस प्रक्रिया में संबंधित स्थान का अक्षांश और देशांतर रिकॉर्ड किया जाएगा। इसके साथ ही मौके की फोटो और वीडियो भी डिजिटल रिकॉर्ड का हिस्सा बनाए जाएंगे। कार्रवाई के दौरान नष्ट की जाने वाली भांग और अफीम की फसल का भी रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।

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पुराने स्थानों पर भी रहेगी नजर
जियो टैगिंग की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि जिन क्षेत्रों में पहले अवैध खेती पकड़ी जा चुकी है, वहां दोबारा निगरानी करना आसान हो जाएगा। यदि किसी स्थान पर नष्ट की गई फसल के बाद दोबारा भांग या अफीम की खेती पाई जाती है तो जांच एजेंसियां पुराने लोकेशन रिकॉर्ड, फोटो और वीडियो से इसकी पुष्टि कर सकेंगी। डिजिटल रिकॉर्ड में यह जानकारी भी दर्ज की जाएगी कि किस स्थान पर कितनी अवैध खेती मिली, कार्रवाई किस तारीख को हुई और कितने क्षेत्र में फसल नष्ट की गई।

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कुल्लू समेत ऊंचाई वाले क्षेत्रों पर फोकस
एनसीबी की निगरानी में कुल्लू समेत हिमाचल के ऊंचाई वाले और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र भी शामिल हैं, जहां नशे की अवैध खेती की शिकायतें सामने आती रही हैं।
जियो टैगिंग के माध्यम से तैयार होने वाला रिकॉर्ड जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में काम कर सकता है। इससे जमीन मालिकों और काश्तकारों से संबंधित जानकारी जुटाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

पुलिस, वन विभाग और एनसीबी के बीच बढ़ेगा तालमेल
इस अभियान में पुलिस, वन विभाग और एनसीबी के बीच सूचनाओं के बेहतर आदान-प्रदान पर भी जोर दिया जा रहा है। मौके पर जुटाए गए डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर एनडीपीएस अधिनियम के तहत कार्रवाई को मजबूत करने में मदद मिल सकती है। एनसीबी इस व्यवस्था को आने वाले समय में प्रदेश के अन्य संवेदनशील जिलों तक भी विस्तार देने की तैयारी कर रहा है।

पहली बार वन विभाग देगा फसल नष्ट करने का प्रमाणपत्र
अवैध नशे की खेती नष्ट करने की कार्रवाई को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए वन विभाग की ओर से प्रमाणपत्र जारी करने की व्यवस्था भी की जा रही है।
मौके पर नष्ट की गई फसल, डिजिटल रिकॉर्ड और फोटो-वीडियो का मिलान करने के बाद प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा। इससे यह पुष्टि करने में मदद मिलेगी कि जिस स्थान पर कार्रवाई दर्ज की गई है, वहां वास्तव में अवैध फसल नष्ट की गई थी। नई व्यवस्था से नशे की अवैध खेती के खिलाफ कार्रवाई में रिकॉर्ड रखने, दोबारा निगरानी करने और जांच को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
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