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हिमाचल हाईकोर्ट का फैसला: अंशकालिक जल वाहकों को 10 साल की सेवा पूरी होने पर ही दैनिक वेतनभोगी का दर्जा

Thu, 27 Aug 2026 07:12 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।

सार

हाईकोर्ट ने अंशकालिक जल वाहकों को डेली वेज (दैनिक वेतनभोगी) का दर्जा देने के मामले में राज्य सरकार के फैसले को गैर-कानूनी ठहराते हुए याचिकाकर्ताओं को बड़ी राहत प्रदान की है। 
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अंशकालिक जल वाहकों को डेली वेज (दैनिक वेतनभोगी) का दर्जा देने के मामले में राज्य सरकार के फैसले को गैर-कानूनी ठहराते हुए याचिकाकर्ताओं को बड़ी राहत प्रदान की है। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की एकल पीठ ने याचिका का निपटारा करते हुए निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं को 10 वर्ष की पार्ट-टाइम सेवा पूरी करने की तिथि से ही होल टाइम कंटीजेंट वर्कर (डेली वेजर) का दर्जा और सभी परिणामी लाभ प्रदान किए जाएं। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को देय सभी बकायों और वरिष्ठता के लाभ जारी करने के आदेश दिए हैं।

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सभी वित्तीय बकायों का भुगतान आदेश की तारीख से तीन महीने के भीतर किया जाना आवश्यक है। यदि तीन महीने के भीतर भुगतान नहीं किया जाता है, तो देय राशि पर निर्णय की तारीख से वास्तविक भुगतान की तारीख तक 6% प्रति वर्ष की दर से ब्याज लगेगा। याचिकाकर्ता भूपिंदर कुमार एवं अन्य की ओर से वर्ष 2012 में रिट याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं को 1998 में पार्ट-टाइम वाटर कैरियर के रूप में नियुक्त किया गया था। शिक्षा विभाग ने 4 अक्तूबर 2012 को उन्हें डेली वेजर का दर्जा दिया और 2016 में उनकी सेवाएं नियमित कर दी।
 
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अदालत ने पाया कि लीला देवी बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य में खंडपीठ द्वारा तय दिशा-निर्देशों के तहत पार्ट-टाइम वाटर कैरियर्स को 10 वर्ष की सेवा पूरी होने पर डेली वेज का दर्जा मिलना अनिवार्य है। डेली वेजर के रूप में 8 वर्ष की सेवा (प्रतिवर्ष न्यूनतम 240 कार्य दिवस) पूरी करने के पश्चात चतुर्थ श्रेणी पदों पर नियमितीकरण का प्रावधान है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि चूंकि याचिकाकर्ता 1998 में नियुक्त हुए थे, इसलिए वे वर्ष 2008 में ही डेली वेजर का दर्जा पाने के हकदार थे। राज्य सरकार द्वारा 2012 में दर्जा देना कानून की नजर में सही नहीं है।
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