हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शिमला शहर में सीवरेज युक्त पानी पीने से फैले पीलिया के मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव सहित प्रधान सचिव स्वास्थ्य, आईपीएच, मुख्य अभियंता आईपीएच और नगर निगम आयुक्त को मंगलवार को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने के आदेश दिए हैं।
मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने 3 जनवरी को ‘अमर उजाला’ में छपी खबर पर संज्ञान लेते हुए यह आदेश पारित किए। कोर्ट ने खेद जताया कि प्रशासन की लापरवाही से शिमला शहर के लोगों को सीवरेज युक्त पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
अश्वनी खड्ड से होने वाली पानी की सप्लाई के कारण पानी से पैदा होने वाली बीमारियों को बढ़ावा मिल रहा है। दिन प्रतिदिन पीलिया के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। सीवरेज युक्त पीले पानी के कारण यह बीमारी जानलेवा हो सकती है।
हाईकोर्ट ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करते हुए स्पष्टीकरण बाबत हाईकोर्ट के समक्ष हाजिर रहने को कहा है। हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार का यह दायित्व बनता है कि वह अपने नागरिकों को स्वच्छ व साफ पीने का पानी मुहैया करवाए। मामले पर मंगलवार को फिर सुनवाई होगी।