ढुलमुल कार्यप्रणाली पर अदालत ने असंतोष जताया
वहीं, राज्य सरकार की ओर से रीजनल प्लान तैयार करने के लिए मांगे गए 18 महीने के अतिरिक्त समय और ढुलमुल कार्यप्रणाली पर अदालत ने असंतोष जताया है। कोर्ट ने सरकार से स्टॉप कंस्ट्रक्शन ऑर्डर्स की पूरी सूची मांगी है, ताकि यह देखा जा सके कि कोर्ट के आदेशों का पालन जमीनी स्तर पर हुआ है या नहीं। सरकार ने क्षेत्र विकास योजनाओं के लिए समय बढ़ाने की अर्जी दी थी। कोर्ट ने पाया कि इसमें कोई निश्चित समयसीमा नहीं दी गई है। शिमला, कांगड़ा और कुल्लू की योजनाओं को अभी प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरी मिलना बाकी है, जबकि मंडी, सोलन, चंबा और नाहन के प्लान मार्च 2027 तक पूरे होने की बात कही गई है। हाईकोर्ट ने उल्लेख किया कि देश की सर्वोच्च अदालत भी एक अलग रिट याचिका में हिमाचल प्रदेश की नाजुक पारिस्थितिकी, भारी मशीनरी के उपयोग और अवैध निर्माणों के खिलाफ दर्ज मुकदमों की स्थिति पर लगातार निगरानी रख रही है। पहाड़ियों के संरक्षण व कटाई से जुड़ी नीति के लिए कोर ग्रुप का गठन केवल 30 जून 2026 को ही किया गया है और अंतिम ड्राफ्ट नीति बनना अभी बाकी है।
सोलन और बड़ोग क्षेत्र में बहुमंजिला इमारतों का निर्माण बरकरार
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सोलन जिले के बड़ोग और आसपास की पहाड़ियों पर धड़ल्ले से हो रहे अवैध बहुमंजिला निर्माण पर कड़ा रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने याद दिलाया कि 11 मई 2026 और 10 जुलाई 2026 के आदेशों में 6 मंजिल से अधिक निर्माण पर रोक लगाई गई थी। अदालत में प्रस्तुत तस्वीरों से खुलासा हुआ कि 2015 से 2026 के दौरान सोलन के खील जाशली, कैंथरी और कोरों क्षेत्रों में अवैध रूप से 9-9 मंजिलों की इमारतें खड़ी कर दी गई हैं।