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हिमाचल: दिल्ली-शिमला-धर्मशाला उड़ानों और संजौली हेलीपोर्ट पर हाईकोर्ट ने मांगी ताजा रिपोर्ट

Thu, 24 Sep 2026 05:57 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।

सार

मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए केंद्र और राज्य सरकार सहित प्रतिवादियों को नए हलफनामे दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
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हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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 हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने दिल्ली-शिमला-धर्मशाला उड़ानों और संजौली हेलीपोर्ट पर ताजा स्थिति रिपोर्ट मांगी है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए केंद्र और राज्य सरकार सहित प्रतिवादियों को नए हलफनामे दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने राज्य में हवाई संपर्क और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से जनहित याचिका यह आदेश दिए हैं। हवाई संपर्क को बढ़ावा देने के लिए अदालत ने भारत सरकार को भी कड़े निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने केंद्र को संशोधित उड़ान योजना की नवीनतम स्थिति और प्रगति के संबंध में एक ताजा हलफनामा पेश करने को कहा है। अब इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 3 नवंबर को होगी।

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खंडपीठ ने मानसून सीजन के दौरान निलंबित की गई दिल्ली-शिमला-धर्मशाला विमान सेवाओं को दोबारा शुरू करने को लेकर प्रतिवादी एलायंस एयर एविएशन लिमिटेड से एक नया हलफनामा तलब किया है। अदालत ने पूछा है कि इस रूट पर उड़ानें फिर से कब बहाल होने की संभावना है। सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता ने अदालत को सूचित किया कि संजौली स्थित हेलीपोर्ट को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह दो इंजन वाले हेलिकॉप्टर का भार भी आसानी से उठा सकता है। इस जानकारी के बाद खंडपीठ ने संबंधित प्रशासन को निर्देश जारी किए हैं कि वे हलफनामा दायर कर यह बताएं कि इस हेलीपोर्ट का अधिकतम और सही उपयोग किस तरह सुनिश्चित किया जा सकता है।

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जर्जर दीवारों से खतरे में पैदल मार्ग, सरकार से मांगा जवाब
वहीं प्रदेश हाईकोर्ट ने जिला कांगड़ा की तहसील रक्कड़ स्थित गांव थप्पल में जर्जर पुराने भवनों के कारण ग्रामीणों के रास्ते पर बने खतरे को लेकर दायर जनहित याचिका पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावलिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने यह संज्ञान महिला मंडल की सदस्य प्रियंका शर्मा और अन्य की ओर से हाईकोर्ट को प्राप्त हुए आवेदन पर लिया है। जनहित याचिका में बताया गया है कि थप्पल में कई पुराने भवन लंबे समय से जर्जर हालत में हैं और इनके साथ ही ग्रामीणों के आने-जाने का रास्ता गुजरता है। महिलाओं ने पहले भी प्रशासन के समक्ष मामला उठाया था। राजस्व अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण भी किया। जिला प्रशासन के स्तर पर इन जर्जर भवनों को सार्वजनिक परेशानी और मानव जीवन के लिए खतरा बताया गया था। खंडपीठ ने फिलहाल मामले को रास्ते की सुरक्षा के मुद्दे तक सीमित रखते हुए नोटिस जारी किया है। अदालत ने राज्य से पूछा है कि रास्ते को सुरक्षित बनाने के लिए कार्रवाई क्यों न की जाए। मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी।
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