प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की अनुकंपा रोजगार नीति के तहत नौकरी देने के मामले में अहम निर्णय सुनाया है। अदालत ने अनुकंपा रोजगार नीति में नौकरी के लिए हिमाचली प्रमाण पत्र होने की शर्त को असांविधानिक ठहराया है। अदालत ने इस शर्त को भारतीय संविधान के अनुछेद 16 (2) के प्रावधानों के विपरीत पाते हुए रद्द कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश एमएस रामचंद्र राव और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने यह निर्णय सुनाया।
पंजाब निवासी संदीप कौर की याचिका को स्वीकार करते हुए अदालत ने उसे वन निगम में नौकरी देने के आदेश दिए है। साथ ही अदालत ने वन निगम की ओर से उसे नौकरी न देने के निर्णय को भी खारिज कर दिया। अदालत ने वन निगम की ओर से याचिकाकर्ता को सार्वजनिक रोजगार से वंचित करने के लिए 10 हजार रुपये की कॉस्ट लगाई है।
अदालत को बताया गया था कि याचिकाकर्ता के पिता वन निगम में वन रक्षक के तौर पर नौकरी करते थे। 16 जुलाई 2020 को नौकरी के दौरान उनकी मौत हो गई थी। याचिकाकर्ता ने 29 अक्तूबर 2021 को राज्य सरकार की अनुकंपा रोजगार नीति के तहत लिपिक के पद के लिए आवेदन किया था। 17 मार्च 2022 को वन निगम ने याचिकाकर्ता से पेंशन प्रमाण पत्र, चरित्र और हिमाचली प्रमाण पत्र जमा करवाने के लिए कहा गया था।
अदालत को बताया गया कि याचिकाकर्ता ने पंजाब पुलिस से जारी किया हुआ चरित्र प्रमाण पत्र पेश किया। अदालत को बताया गया कि उसने हिमाचली प्रमाण पत्र जारी करने के लिए आवेदन किया था लेकिन हिमाचल में उसका घर न होने के कारण यह प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया। 7 जून 2023 को वन निगम ने याचिकाकर्ता के आवेदन को यह कहकर खारिज कर दिया कि याचिकाकर्ता के दस्तावेज अनुकंपा रोजगार नीति के तहत नहीं है।
अदालत ने मामले से जुड़े रिकॉर्ड का अवलोकन करने पर पाया कि याचिकाकर्ता को उस कार्य को करने के लिए कहा गया जो संभव नहीं था। अदालत ने कहा कि सार्वजनिक रोजगार के लिए हिमाचली प्रमाण पत्र की शर्त जरूरी करना गैर कानूनी है। अदालत ने कहा कि यह प्रमाणित है कि याचिकाकर्ता वन निगम के कर्मी की लड़की है और भारत की नागरिक है। ऐसे में अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने के लिए हिमाचली प्रमाण पत्र की शर्त असांविधानिक है।