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Himachal News: पंचायत रोस्टर के बेस ईयर को लेकर जारी अधिसूचना पर रोक से हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का इन्कार

Wed, 22 Apr 2026 10:36 AM IST
Ankesh Dogra भारती मेहता, शिमला।

सार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने से अदालती आदेशों के तहत हो रही निर्वाचन प्रक्रिया बाधित होगी। ऐसे में हाईकोर्ट ने चुनाव संबंधी पंचायत रोस्टर के बेस इयर को लेकर 21 मार्च 2026 को जारी अधिसूचना पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया है। पढ़ें पूरी खबर...
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने चुनाव संबंधी पंचायत रोस्टर के बेस इयर को लेकर 21 मार्च 2026 को जारी अधिसूचना पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने से अदालती आदेशों के तहत हो रही निर्वाचन प्रक्रिया बाधित होगी। 

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न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने  सरकार व अन्य सभी पक्षों को नोटिस जारी करते हुए चार हफ्ते में जवाब दाखिल करने को कहा है। इस मामले की अगली सुनवाई एक जून को होगी। याचिकाकर्ता लेख राम ने याचिका के साथ एक अंतरिम आवेदन दायर कर मांग की थी 21 मार्च 2026 को जारी अधिसूचना के कार्यान्वयन पर रोक लगा दी जाए और बेस ईयर 2010 ही रखा जाए। 

हाईकोर्ट ने दिक्कन कुमार मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि रोक लगाने से अदालत के आदेशानुसार हो रहे चुनावों में बाधा आएगी। अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि 21 मार्च 2026 को जारी अधिसूचना जिसमें बेस ईयर को 2025 माना गया है वह अब समाप्त हो गई है, क्योंकि सरकार ने 31 मार्च को एक अन्य अधिसूचना जारी कर दी है। इसके तहत डीसी को रोस्टर में 5 फीसदी कोटा देने की शक्ति दी है। कोर्ट ने 6 अप्रैल को अधिसूचना पर रोक लगा दी है। सरकार ने 7 अप्रैल को जो रोस्टर जारी किया है उसका बेस ईयर 21 मार्च की अधिसूचना के मुताबिक 2025 ही रखा गया है। 

याचिका में बताया गया है कि 31 मार्च की अधिसूचना पर रोक लगाने के बाद बेस ईयर 2010 होना चाहिए था, न की 2025। अधिसूचना पर रोक लगाने के बाद पिछली अधिसूचना स्वयं ही निर्जीव हो जाती है। याचिका में हिमाचल प्रदेश पंचायती इलेक्शन रूल 1994 के 87,88,89 के सब रूल 4 के प्रोवाइजो और 8 ए को भी चुनौती दी गई है, जिसके तहत 5 फीसदी से कम जनसंख्या वाली जाति को आरक्षण रोस्टर से बाहर रखा गया है।
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याचिकाकर्ता ने रूल को संविधान अनुच्छेद 243डी के खिलाफ बताया है। इसके तहत पंचायती और शहरी निकायों में 50 फीसदी सीटें महिलाओं के लिए और एक तिहाई अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित करने की बात की गई है। 

यह है मामला : मामला सोलन की शड़याना पंचायत का है। वर्ष 2005 से अभी तक पंचायत प्रधान पद महिला सामान्य और महिला एससी के लिए आरक्षित है। 25 वर्षों से पुरुष यहां चुनाव नहीं लड़ पाए। आरोप है कि सरकार बार-बार बेस ईयर में बदलाव कर रही है, जिसकी वजह से आरक्षण रोस्टर का लाभ सभी वर्गों को नहीं मिल रहा है। 8 सितंबर 2010 को पहली मर्तबा रूल 8ए जोड़ा गया।
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