हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक ट्रिब्यूनल ने हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड को लताड़ते हुए कहा कि बोर्ड जैसी सार्वजनिक संस्था से उसने लालफीताशाही, मनमाने और गैर जिम्मेदार रवैये की उम्मीद नहीं थी। ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष न्यायाधीश वीके शर्मा और सदस्य प्रेम कुमार की खंडपीठ ने धर्मशाला सर्किट बेंच के दौरान यात्रा भत्ते से जुड़े मामले का निपटारा करते हुए यह लताड़ लगाई।
ट्रिब्यूनल ने बोर्ड के अधिकारियों और कर्मचारियों को आदेश दिए कि जैसे प्रार्थी को यात्रा भत्ते जैसे मुद्दे पर भटकाने की कोशिश की गई, ऐसी कोशिश भविष्य में किसी और कर्मचारी से नहीं होनी चाहिए। मामले के अनुसार बोर्ड में कार्यरत सीनियर असिस्टेंट कृष्ण चंद वर्ष
1994 में जूनियर असिस्टेंट के पद पर तैनात थे। मार्च 1994 में होने वाली बोर्ड की परीक्षाओं से जुड़ी सामग्री को वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला काजा पहुंचाने के लिए उन्हें और साथ एक चपरासी को जिम्मेदारी सौंपी गई।