दिनेश कुमार वर्ष 1997 में हिमाचल प्रदेश पुलिस में कांस्टेबल भर्ती हुए थे और 2011 में हेड कांस्टेबल बने। जनवरी 2016 में कोटखाई थाना में उनके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ। अप्रैल 2018 में स्पेशल जज (फॉरेस्ट) शिमला ने उन्हें दोषी ठहराते हुए 14 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसी सजा के आधार पर विभाग ने जुलाई 2018 में उन्हें बर्खास्त कर दिया। उनके खिलाफ चल रही विभागीय जांच यह कहते हुए बंद कर दी गई कि अदालत से सजा होने के बाद जांच जारी रखने का औचित्य नहीं है। दिनेश ने सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की।
अक्तूबर 2023 में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने निचली अदालत का फैसला पलटते हुए उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत पेश करने में नाकाम रहा था। राज्य सरकार ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की, जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने जुलाई 2025 में खारिज कर दिया। दिनेश ने बहाली के लिए विभाग को प्रतिवेदन दिया। शिमला के तत्कालीन एसपी ने अगस्त 2025 में आवेदन खारिज करते हुए कहा कि भले ही वह अदालत से तकनीकी आधार पर बरी हुए हों, लेकिन विभागीय जांच में मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल होने के सबूत मिले हैं।