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हाईकोर्ट से एचपीसीए अध्यक्ष अनुराग ठाकुर को बड़ी राहत

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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एचपीसीए अध्यक्ष अनुराग ठाकुर (भाजपा सांसद व बीसीसीआई सचिव) को धर्मशाला सीजेएम कोर्ट में चल रहे दो मामलों में बड़ी राहत दी है। हाईकोर्ट ने एचपीसीए स्टेडियम के लिए शिक्षा विभाग की जमीन पर अवैध कब्जा करने संबंधी मामले और एसपी ऑफिस धर्मशाला में नारेबाजी मामले में लोअर कोर्ट में सुनवाई पर रोक लगा दी है।
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अब दोनों मामलों की सुनवाई हाईकोर्ट में होगी। न्यायाधीश राजीव शर्मा ने अनुराग ठाकुर और संजय शर्मा की दायर याचिकाओं पर सुनवाई के बाद चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट धर्मशाला के समक्ष चल रहे मामले की आगामी सुनवाई पर स्थगन आदेश पारित किए हैं। याचिका के अनुसार आरोप है कि प्रदेश सरकार ने राजनीतिक भेदभाव के चलते एचपीसीए पर तरह-तरह के मामले दर्ज किए हैं।

कांग्रेस चार्जशीट के दबाव में आकर एचपीसीए पर 1941 वर्ग मीटर भूमि पर अवैध कब्जा करने का झूठा मामला बनाया गया है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार सरकार ने एचपीसीए को 49118 वर्ग मीटर भूमि लीज पर दी है और उनका कब्जा केवल 45959 वर्ग मीटर पर ही है।
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प्रार्थियों ने हाइकोर्ट में दी यह दलीलें

यदि एचपीसीए के कब्जे को देखा जाए तो उनके पास अभी भी 3158 वर्गमीटर भूमि आवंटित भूमि से कम है। प्रार्थियों का कहना है कि जिन खसरा नंबरों पर कब्जे की बात कही जा रही है वो किसी गलती से लीज दस्तावेज में अंकित नहीं हुए। यह गलती भी सरकार की ओर से ही हुई है। यह मामला अवैध कब्जे का नहीं बल्कि गलती का है।

जिसे राजस्व रिकॉर्ड को दुरुस्त कर सुधारा जा सकता है। याचिकाकर्ताओं का यह भी आरोप है कि उन पर 414 वर्गमीटर निजी भूमि को कब्जाने का भी आपराधिक मामला दर्ज कर दिया गया है। सरकार के अनुसार प्रार्थियों ने शिक्षा विभाग के नाम पर दर्ज सरकारी भूमि पर कब्जा किया और उस पर स्थित भवन को अवैध तरीके से गिराया है।

वहीं दूसरे मामले में अनुराग ठाकुर, पूर्व विधायक प्रवीण शर्मा, संजय शर्मा, विधायक वीरेंद्र कंवर, युवा मोर्चा पदाधिकारी नरेंद्र अत्री, विश्व ज्योति चक्षु के साथ 200 से 250 लोगों ने सतर्कता विभाग के धर्मशाला स्थित एसपी कार्यालय में झूठा केस वापस लेने संबंधी नारेबाजी की। सभी लोगों ने करीब आधा घंटा एसपी ऑफिस धर्मशाला में नारेबाजी की और सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाई।
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एचपीसीए ने प्रतिवादियों की सूची से हटवाया सीएम का नाम

सभी आरोपियों को एक मामले में पूछताछ के लिए 24 अक्तूबर 2013 के बजाय 31 अक्तूबर 2013 को एसपी ऑफिस बुलाया गया था। लेकिन यह लोग लाव लश्कर के साथ 24 अक्तूबर को ही एसपी ऑफिस आ धमके। सभी ने आपत्तिजनक नारे लगाए और सरकारी कार्य में बाधा डाली। सभी आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 186 के तहत मामला दर्ज किया गया था।

सीजेएम धर्मशाला ने इस मामले में 26 फरवरी को सुनवाई निर्धारित की थी। प्रार्थियों के अनुसार उनके खिलाफ ऐसे कोई सबूत नहीं है जो यह साबित कर सकें कि उन्होंने नारेबाजी की और सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाई। याचिकाकर्ताओं ने उनके खिलाफ दर्ज मामले को खारिज करने की गुहार लगाई है। हाईकोर्ट में इस मामले पर अगली सुनवाई 8 मार्च को होगी।

धर्मशाला कोर्ट में चल रहे एचपीसीए के अवैध कब्जे से संबंधित मामले में याचिकाकर्ताओं ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को भी प्रतिवादी बनाया था। लेकिन याचिकाकर्ताओं के वकील ने उनका नाम प्रतिवादी सूची से हटाने के आग्रह के बाद कोर्ट ने मुख्यमंत्री का नाम हटाने के आदेश पारित किए।

राजधानी शिमला में पीलिया फैलने के मामले में हाईकोर्ट की ओर से सरकार की स्टेटस रिपोर्ट पर सुरक्षित रखे गए फैसले को वीरवार सुबह दस बजे सुनाया जाएगा। हाईकोर्ट ने मंगलवार की सुनवाई के दौरान पीजीआई निदेशक और प्रदेश के सभी जिलों के सीएमओ से पीलिया की चपेट में आकर मरने वाले लोगों का आंकड़ा कोर्ट में पेश करने के आदेश दिए थे।
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