हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने नियमों के विरुद्ध नियुक्ति के मामले में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तल्ख टिप्पणी की है। अदालत के समक्ष उपस्थित रजिस्ट्रार ने बताया कि विश्वविद्यालय की कार्यकारिणी परिषद ने याचिकाकर्ता को नियमित करने की स्वीकृति दे दी थी। जबकि वित्त कमेटी ने इसे खारिज कर दिया था। अदालत ने कहा कि वित्त कमेटी में भी विश्वविद्यालय के ही अधिकारी हैं। न्यायाधीश संदीप शर्मा ने याचिकाकर्ता को नियमित करने के बारे में उचित निर्णय लेने के लिए तीन हफ्ते का समय दिया है।
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में सेल्फ फाइनेंस स्कीम के तहत भर्ती मामले में रजिस्ट्रार को तलब किया गया था। मामले से जुड़े रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद अदालत ने पाया था कि सेल्फ फाइनेंस स्कीम के तहत सैकड़ों नियुक्तियां की गईं। इतना ही नहीं, उन्हें नियमित करने के बाद विश्वविद्यालय के विभागों में उस समय भेजा गया, जब पद खाली नहीं थे। याचिकाकर्ता विजय कुमार ने आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय में विभिन्न पदों को नियमों के विरुद्ध नियुक्त किया गया। इनमें सहायक, क्लर्क और चपरासी शामिल हैं।
130 आउटसोर्स कर्मचारियों के नियमितीकरण पर पहले ही लगी है रोक
हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय के 130 आउटसोर्स कर्मचारियों के नियमितीकरण पर पहले ही रोक लगाई है। इनकी भर्ती नियमों के विपरीत किए जाने का आरोप लगाया है। खंडपीठ ने स्पष्ट किया था कि ऐसे कर्मचारियों को नियमित न किया जाए, जिन्हें भर्ती एवं पदोन्नति नियमों को दरकिनार कर नियुक्त किया गया है। आरोप लगाया गया है कि विश्वविद्यालय में रिक्त पदों को भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के तहत भरने की बजाय आउटसोर्स के आधार पर भरा जा रहा है।