प्रदेश हाईकोर्ट ने ग्रेच्युटी पर ब्याज न देने पर सहकारिता पंजीयक से स्पष्टीकरण तलब किया है। अदालत की ओर से जारी कारण बताओ नोटिस के जवाब से खंडपीठ ने असंतोष जताया है। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई 14 मार्च को निर्धारित की है। 10 जनवरी 2022 को अदालत ने सहकारिता पंजीयक को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा था कि क्यों न ब्याज के 4,36,078 रुपये उससे वसूले जाएं। साथ ही अदालत ने याचिकाकर्ता को ग्रेच्युटी पर ब्याज के 4,36,078 रुपये अदा करने के आदेश दिए थे। खंडपीठ ने सचिव को आदेश दिए कि थे वह चार हफ्ते के भीतर मामले की जांच करें और दोषी अधिकारियों से ब्याज की राशि वसूलें, चाहे दोषी अधिकारियों में सहकारिता पंजीयक ही क्यों न हो। मामले के अनुसार सहकारिता विभाग ने याचिकाकर्ता को 29 जून 2017 को निलंबित किया था। अगले ही दिन वह सहायक पंजीयक के पद से सेवानिवृत्त हो गया।
18 जुलाई 2017 को विभाग ने उसके खिलाफ आरोपपत्र जारी कर दिया और उसके सारे वित्तीय लाभ रोक दिए। याचिकाकर्ता के खिलाफ विभाग ने आरोप लगाया था कि उसने अपने कर्तव्य का निर्वहन नहीं किया, जिससे हमीरपुर की बलूट सहकार समिति में करोड़ों रुपयों का घोटाला हुआ। इस आरोप पत्र को याचिकाकर्ता ने अदालत के समक्ष चुनौती दी। अदालत ने 30 दिसंबर 2021 को विभाग की ओर से जारी आरोप पत्र को रदद्दद कर दिया था। 12 मई 2022 को विधि विभाग ने सलाह दी कि हाईकोेर्ट के निर्णय को लागू करना ही उचित है। 26 मई 2022 को विभाग ने याचिकाकर्ता की ग्रेच्युटी अदा कर दी, लेकिन इस पर चार वर्ष का ब्याज देने से इनकार कर दिया। अदालत ने पाया कि 5 सितंबर 2022 को सचिव सहकारिता ने पंजीयक सहकारिता को निर्देश दिए थे कि याचिकाकर्ता देरी से दी गई ग्रेच्युटी पर ब्याज का हक रखता है। इसके बावजूद भी पंजीयक ने याचिकाकर्ता को ब्याज देने से इनकार कर दिया।