याचिकाकर्ता की उम्मीदवारी को आयोग ने पहली श्रेणी में बदलाव के कारण उसके आवेदन को अस्वीकार कर दिया था। याचिकाकर्ता अमित सिंह ने लोकसेवा आयोग की ओर से 17 अक्तूबर 2023 को विज्ञापित पद के लिए आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के तहत आवेदन किया था। याची ने 9 जून 2024 को लिखित परीक्षा दी। परिणाम घोषित होने से पहले ही याचिकाकर्ता को 26 सितंबर 2024 को जेओआईटी के पद पर चयनित कर लिया गया था। इस नई नौकरी के कारण उसकी वित्तीय स्थिति बदल गई, जिससे वह ईडब्ल्यूएस श्रेणी के दायरे से बाहर हो गया।
हिमाचल प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन ने 31 जनवरी 2025 को अमित सिंह की उम्मीदवारी इस आधार पर खारिज कर दी थी कि दस्तावेज सत्यापन की तिथि 29 जनवरी 2025 तक उसकी श्रेणी ईडब्ल्यूएस से अनारक्षित श्रेणी में बदल चुकी थी। याची नवीनतम ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने में असमर्थ थे। आयोग ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता ने श्रेणी परिवर्तन के बारे में समय पर आयोग को सूचित नहीं किया था। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि भले ही उनकी श्रेणी बदल गई हो, लेकिन फिर भी उन्हें आरक्षित श्रेणी के तहत माना जाना चाहिए क्योंकि उन्होंने उस श्रेणी के कट ऑफ अंकों से अधिक अंक प्राप्त किए है।
वहीं आयोग की ओर से कहा गया कि उम्मीदवारों को मुख्य परीक्षा और दस्तावेज सत्यापन के समय अपनी वर्तमान श्रेणी स्थिति का प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना होता है। उन्होंने कहा कि सत्यापन की तिथि पर ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं कर सका इसलिए आयोग ने उसकी उम्मीदवारी को खारिज किया है। अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता को ईडब्ल्यूएस श्रेणी के तहत आवेदन करने के लिए आयु में कोई छूट नहीं मिली है, केवल आवेदन शुल्क में कमी की गई थी। कोर्ट ने याचिकाकर्ता के आवेदन को स्वीकार करते हुए यह फैसला दिया है।