हाईकोर्ट ने आपराधिक मामलों में गवाहों के मुकरने के बढ़ते प्रचलन को लेकर सरकार को आदेश दिए कि मामलों की जांच के दौरान जांच अधिकारी गवाहों के बयानों की वीडियो या ऑडियो रिकॉर्डिंग करें। न्यायाधीश राजीव शर्मा ने चरस तस्करी के एक मामले में सरकार की अपील को मंजूर कर यह आदेश दिए।
हाईकोर्ट ने गृह विभाग के प्रधान सचिव को आदेश दिए कि वह सभी पुलिस अधीक्षकों को निर्देश जारी करें कि आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 161 में दर्ज होने वाले बयान कानून की अक्षरश: अनुपालना करवाएं। कहा कि यह न्याय कि दृष्टि से अति महत्वपूर्ण है कि गवाहों के बयानों से मुकरने के प्रचलन पर काबू पाया जाए।
अनेकों गवाह पुलिस को दिए बयानों से उस समय मुकर जाते हैं, जब उन्हें अदालत में गवाही को अभियोजन पक्ष से प्रस्तुत किया जाता है। इसका असर यह होता है कि अपराधी अकसर संदेह का लाभ लेते हुए बरी हो जाते हैं। मामले के अनुसार पुलिस ने ज्ञान चंद को 5 जनवरी की रात को शिमला से दिल्ली जाने वाली हरियाणा रोडवेज की बस में 3 किलो 300 ग्राम चरस ले जाते हुए पकड़ा।
अभियोजन पक्ष ने जांच के बाद कुल 14 गवाह विशेष न्यायाधीश सोलन के समक्ष पेश कर दोष साबित करने की कोशिश की। मामले की जांच से जुड़े कुछ पुलिस कर्मी और हरियाणा रोडवेज के कर्मचारी अपने पुलिस को दिए बयानों से मुकर गए और अपराधी छूट गया। सरकार ने हाईकोर्ट में अपील दायर की, इसे मंजूर कर कोर्ट ने सरकार को यह आदेश दिए।