बल्ह में तीन युवकों को 287 ग्राम चिट्टे के साथ गिरफ्तार किया गया था। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि किसी ने उनसे फिरौती की मांग की थी और कहा कि अगर पैसों का इंतजाम किया तो आपके बेटे पर एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने अदालत में बताया कि युवकों को गलत तरीके से फंसाया है। दलील में कहा कि 31 मार्च को याचिकाकर्ता को शाम करीब 6:00 बजे एक नंबर से फोन आया और बताया कि उसके बेटे दीपक की गाड़ी में सवार दो लोगों को पुलिस ने चिट्टे के साथ गिरफ्तार किया है।
याचिकाकर्ता ने बेटे को छोड़ने का आग्रह किया तो बदले में एक लाख रुपये की व्यवस्था करने को कहा गया। कहा कि अगर पैसे नहीं दिए तो बेटे को मामले में फंसाया जाएगा। इसके बाद याचिकाकर्ता ने पैसे का प्रबंध किया और तीन रिश्तेदार के साथ नेरचौक रवाना हुए। बीच रास्ते में बाबा बालक नाथ मंदिर के नजदीक पुलिस मिली और याचिकाकर्ता ने पुलिस को आपबीती सुनाई। पुलिस ने याचिकाकर्ता की बातों पर ध्यान नहीं दिया। अदालत के आदेशों की अनुपालना की अगली सुनवाई 3 मार्च को होगी।