किसी ने मुर्दे जलाने के नाम पर तो किसी ने अन्य बहाना बनाकर पेड़ों पर कुल्हाड़ी चला दी। हिमाचल हाईकोर्ट में अवैध कटान के एक मामले की पैरवी कर रहे एमिकस क्यूरी अधिवक्ता अमन सूद की रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में बताया गया है कि रोहड़ू के टिक्कर से करीब 15 किलोमीटर दूर गांव शालन में शवदाह के नाम पर देवदार के 18 पेड़ों को काट दिया गया।
शवदाह के लिए नियमानुसार कैल के पेड़ काटने की प्राथमिकता दी जानी चाहिए थी मगर ऐसा नहीं किया गया। धर्मशाला में कई जगह पेड़ों को इसलिए काटा गया कि पेड़ गाड़ी पार्किं ग में दिक्कतें पैदा कर रहे थे। धर्मशाला में अपर धर्मकोट इलाके में सिडार हिमालयन
पैराडाइस का निर्माण तो पूरी तरह नियमों की अनदेखी कर किया जा रहा है। पेड़ों को कंक्रीट में दबाया जा रहा है। नगर निगम धर्मशाला एवं वन विभाग की ओर से न के बराबर कार्रवाई की जा रही है। हाईकोर्ट ने इसी मामले में मंडी के कटौला वन क्षेत्र में काटे गए पेड़ों पर संज्ञान लेते हुए अगली सुनवाई दो अगस्त को निर्धारित की है।
सरकार के लिए आंखें खोलने वाली है रिपोर्ट
एमिकस क्यूरी अधिवक्ता अमन सूद ने हाईकोर्ट को रिपोर्ट सौंप दी है। मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने रिपोर्ट का अवलोकन करने पर कहा कि यह रिपोर्ट सरकार के लिए आंखें खोल देने वाली है। कोर्ट ने प्रदेश में लगातार हो रहे अवैध वन कटान की शिकायतों के मद्देनजर प्रदेश सरकार से इस रिपोर्ट पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए चार
सप्ताह का समय दिया है। संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षकों को आदेश दिए हैं कि वन काटुओं के खिलाफ कोर्ट के आदेशानुसार आपराधिक मामले दर्ज कर संबंधित न्यायालयों में अभियोजन चलाएं। पुलिस अधीक्षकों को चार सप्ताह के भीतर स्टेटस रिपोर्ट दायर करने को भी कहा है।
जबरन भूमि चयन करवाने के लिए काटे 51 पेड़
रिपोर्ट में बताया गया है कि रोहडू़ तहसील के तहत टिक्कर कॉलेज भवन निर्माण के लिए जबरन भूमि चयन करवाने के लिए वन भूमि से 51 पेड़ काट लिए गए थे। पुलिस चौकी टिक्कर से महज एक किलोमीटर की दूरी पर काटे गए इन पेड़ों में 49 पेड़ कैल के और एक-एक देवदार और रई के थे।
ये पेड़ संरक्षित वन क्षेत्र कशैनी में बिना अनुमति केवल इसलिए काट लिए गए, जिससे उस भूमि पर कम से कम पेड़ नजर आएं और कॉलेज के लिए भूमि का चयन आसानी से हो जाए। इस क्षेत्र में डीएफओ की ओर से टीडी अधिकारों को निलंबित करने के निर्णय को एमिकस क्यूरी ने सही और तर्कसंगत ठहराया है।
हाईकोर्ट ने पलटा फैसला, दोषी पति को दो को होगी सजा
हिमाचल हाईकोर्ट ने पत्नी की हत्या करने वाले कांगड़ा के बैजनाथ निवासी रमेश चंद को दोषी करार देते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कांगड़ा स्थित धर्मशाला के फैसले को पलट दिया। उसे दो अगस्त को भारतीय दंड संहिता की धारा 498 ए और 302 के तहत सजा सुनाई जाएगी।
न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने सरकार की अपील को मंजूर करते हुए यह फैसला सुनाया। मामले के अनुसार शादी के बाद वीना से पति मारपीट करता था। पंचायत और पुलिस में समझौता भी हुआ लेकिन 21 जुलाई 2009 को रमेश ने नशे में आठ वर्षीय बेटी सिमरन के सामने वीना पर तेल छिड़ककर आग लगा दी।
दोषी ने इसे आत्महत्या का मामला बताया, लेकिन जांच के बाद पाया गया कि दोषी ने ही उसकी हत्या की। बता दें कि निचली अदालत ने 18 जनवरी 2012 को रमेश चंद को बरी कर दिया था। राज्य सरकार ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी, जिसके बाद हाईकोर्ट ने इस फैसले को पलट दिया।