स्वास्थ्य विभाग प्रदेश में पहली बार कोरोना की तरह मलेरिया का टेस्ट भी रैपिड किट से करेगा। इसमें मरीज का ब्लड डालने के 30 मिनट बाद रिपोर्ट मिल जाएगी। विभाग यह सुविधा घर-द्वार देगी। गौर रहे कि अभी तक प्रदेश में मलेरिया की जांच स्लाइड (सूक्ष्म दर्शी जांच) से की जाती थी।
मलेरिया की जांच के बाद अब मरीजों को रिपोर्ट के लिए न तो 72 घंटे तक इंतजार करना पड़ेगा और न ही उन्हें इसके लिए अस्पताल जाना जरूरी होगा। स्वास्थ्य विभाग प्रदेश में पहली बार कोरोना की तरह मलेरिया का टेस्ट भी रैपिड किट से करेगा। इसमें मरीज का ब्लड डालने के 30 मिनट बाद रिपोर्ट मिल जाएगी। विभाग यह सुविधा घर-द्वार देगी। गौर रहे कि अभी तक प्रदेश में मलेरिया की जांच स्लाइड (सूक्ष्म दर्शी जांच) से की जाती थी। इससे सैंपल लेकर करीब 72 घंटे तक मशीन में जांचे जाते थे।
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इससे मरीजों को करीब तीन दिन तक रिपोर्ट का इंतजार करना पड़ता था। इससे मरीज का इलाज शुरू नहीं हो पाता था। वहीं कई बार सैंपल खराब होने से सही रिपोर्ट भी नहीं आती थी। साथ ही लैब तकनीशियनों की कमी के कारण भी जांच में देरी होती थी। अब रैपिड किट से सैंपल लेने के 30 मिनट बाद ही रिपोर्ट मिल जाएगी। साथ ही सैंपल लैब ले जाने की जरूरत भी नहीं होगी। रैपिट किट से जांच के लिए चिकित्सकों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। सोलन जिला में किट भी उपलब्ध हो गई हैं। अन्य जिला में भी किटें जल्द पहुंच जाएंगी।
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की टीम के सर्वे के बाद केंद्र ने दी अनुमति
जिला कार्यक्रम अधिकारी सोलन डॉ. एके सिंह ने बताया कि हिमाचल प्रदेश में हाल ही में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की टीम ने मलेरिया को लेकर सर्वे किया था। यह सर्वे जिला सोलन, ऊना, सिरमौर, कांगड़ा, हमीरपुर, बिलासपुर और चंबा के कुछ इलाकों में किया गया। इसकी रिपोर्ट में लैब तकनीशियनों की कमी का भी उल्लेख किया गया। साथ ही रैपिड किट के हिमाचल प्रदेश में इस्तेमाल करने की अनुमति के लिए लिखा गया था। इसके बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने हिमाचल प्रदेश में मलेरिया की जांच रैपिड किट से शुरू करने की अनुमति दे दी।
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सूबे के गर्म इलाकों में करीब हर सीजन करीब 500 लोग आते चपेट में
हिमाचल प्रदेश के गर्म इलाकों जैसे ऊना, सोलन, कांगड़ा के कुछ इलाकों, बिलासपुर, हमीरपुर में मलेरिया के मामले सामने आते हैं। सीजन में करीब 500 मरीज मलेरिया की चपेट में आते हैं।