ट्रस्टों, उद्योगों, केंद्र सरकार और बाहरी सरकारों की ओर से हिमाचल में किए गए तमाम जायज और नाजायज कब्जों का हिमाचल सरकार खाका तैयार करेगी। सूबे के सभी उपायुक्त छह महीने में यह ब्योरा तैयार करेंगे। प्रदेश में ऐसी जमीन से लैंड बैंक बनाया जा सकता है। यह जानकारी संसदीय कार्य मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने सदन में प्राइवेट मेंबर्स डे पर धर्मपुर के भाजपा विधायक महेंद्र सिंह की ओर से लाए गए प्रस्ताव पर अपने जवाब में दी।
महेंद्र सिंह ने सदन में ‘अमर उजाला’ में 19 सितंबर 2015 को छपी खबर को विधानसभा सदस्यों को दिखाया। उन्होंने अखबार को लहराते हुए इसका हेडिंग ‘पुजारियों, कारदारों ने हड़पी देवताओं की 90 हजार बीघा जमीन’ पढ़ते हुए कहा कि हिमाचल में छोटे और गरीब लोगों के कब्जों को छुड़ाने के बजाय इस तरह के कब्जों को चिह्नित करने की जरूरत है।
महेंद्र सिंह ने अन्य ट्रस्टों, बिजली प्रोजेक्टों, उद्योगों आदि के कब्जों को चिह्नित कर इनके कब्जों की संपत्तियों को सरकार के नियंत्रण में लेने को कहा। अग्निहोत्री ने जवाब में कहा कि सदन में कौल सिंह ठाकुर नहीं हैं और वे उनकी गैर हाजिरी में ही जवाब दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार पट्टे पर जमीन देती रही है। इसकी मालिक सरकार है।
इस्तेमाल ने करने वालों से वापस ली जाएगी जमीन
कुछ मामलों में मालिकाना हक भी बन जाता है। जो जमीन केंद्र के पास चली गई है या किसी अन्य सरकार या एजेंसी के पास है, उसे वापस लेने का प्रयास किया जाएगा। पहले इन संपत्तियों का खाका तैयार करना होगा। सरकार सभी उपायुक्तों को निर्देश देगी कि इस बारे में सूचनाएं दी जाएं। ये सूचनाएं छह माह में एकत्र करने के प्रयास होंगे। जो जमीनें नियमानुसार वापस ली जा सकती हैं, उन्हें कब्जे में लिया जाएगा।
केंद्र की एजेंसियों के सामने भी मामले उठाए जाएंगे। इन्हें टाइम बाउंड समय में उठाएंगे। महेंद्र सिंह ने ट्रस्ट, वक्फ बोर्ड, बेनामी संपत्तियों, मंदिरों, सेरीकल्चर आदि को दी गई संपत्तियों पर कब्जे की भी बात की। अग्निहोत्री ने स्पष्ट किया कि सेरीकल्चर की जमीनें सरकार के कब्जे में हैं। उद्योगों को भी जमीनें दी गई हैं और कुछ उद्योगों ने जमीनें ज्यादा ले रखी हैं। जिन्होंने जमीन का इस्तेमाल नहीं किया है, उनसे इसे वापस लेने का प्रयास किया जाएगा।
ट्रस्टों की बात है तो चिंतपूर्णी सहित कई क्षेत्रों में बडे़ कब्जे देखे गए हैं। तमाम तरह के कब्जों को चिह्नित करने के लिए पांच-छह महीने में एक बड़ी एक्सरसाइज की जाएगी। हिमाचल में लैंड बैंक भी बनाया जा सकता है। विधायकों को भी अपने क्षेत्रों में योजनाओं के लिए जमीनें चिह्नित करने में दिक्कत आ रही है।
पंजाब सरकार के कब्जों का मामला भी उठा
बीबीएमबी के पास जो जमीनें बेकार पड़ी हैं, उन्हें वापस लेने को भी काम किया जाएगा। मंदिरों के कब्जों का मामला संवेदनशील है। इस पर भी विचार करेंगे। विभागों की जमीनें भी राजस्व अथॉरिटी के पास लाने का प्रयास किया जाएगा। अग्निहोत्री ने महेंद्र सिंह से प्राइवेट मेंबर्स डे पर नियम 101 के तहत लाए गए इस प्रस्ताव को वापस लेने का अनुरोध किया। महेंद्र सिंह सरकार से अवैध कब्जों को चिह्नित करने की समय-सीमा छह महीने तय होने के बाद प्रस्ताव वापस लेने पर सहमत हो गए।
हिलोपा विधायक महेश्वर सिंह ने प्रदेश में पंजाब सरकार की कई खाली पड़ी जमीनों और अन्य संपत्तियों को क ब्जे में लेेने का मामला उठाया। इस पर मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि पंजाब सरकार से भी ये मसला उठाया जाएगा। पंजाब सरकार की कई जमीनें हिमाचल सरकार के बनने के बाद किन्हीं कारणों से वापस नहीं की जा सकीं। हमें आज भी हिमाचल भवन बनाने के लिए नोटिस दिए गए हैं। वे यहां मालिकाना हक लिए हुए हैं।