हिमाचल में बैक यार्ड पोल्ट्री के बदले अब सरकार बड़े पोल्ट्री प्रोजेक्टों में वित्तीय मदद करेगी। पशुपालकों को पोल्ट्री के छोटे प्रोजेक्टों के दूरगामी परिणाम नहीं आने से सरकार ने नीति बदली है। सरकार बड़े पोल्ट्री प्रोजेक्टों में 50 फीसदी उपदान देगी। इसकी अधिकतम सीमा पचीस लाख रुपये तक रहेगी। प्रदेश में अभी तक सरकार बैक यार्ड यानी घरों के पीछे मुर्गी पालन के प्रोजेक्ट शुरू किए थे लेकिन इनके सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आए।
सरकार ने राज्य में पशुपालकों की आय बढ़ाने के लिए बैक यार्ड पोल्ट्री शुरू करने में मदद की थी। जैसे ही पशुपालकों की आय में थोड़ा सुधार हुआ तो दूसरे व्यवसाय की ओर कदम बढ़ा दिए। सरकार ने जिस मकसद से ये योजना आरंभ की थी, उसे हासिल नहीं किया जा सका। अब सरकार पोल्ट्री के बड़े प्रोजेक्टों को वित्तीय मदद देगी ताकि इसे लोग लंबे समय तक व्यवसाय के रूप में अपना सकें। सरकार का मानना है कि ऐसे प्रोजेक्टों को शुरू करने से पोल्ट्री फार्म व्यवसाय से अधिक से अधिक रोजगार सृजित किए जा सकेंगे।
नेशनल लाइव स्टॉक मिशन से मिलेगी वित्तीय मदद
प्रदेश के पशुपालकों को पोल्ट्री फार्म के लिए केंद्र सरकार से नेशनल लाइव स्टॉक मिशन से वित्तीय मदद प्रदान की जाएगी। योजना में 50 फीसदी तक उपदान मिलेगा और अधिकतम 25 लाख तक सब्सिडी मिलेगी।
बैंकों में योजना के लाभार्थी के दो बैंक खाते खुलेंगे
दिशा निर्देशों के अनुसार योजना का लाभ उठाने वाले लाभार्थी के राष्ट्रीयकृत बैंक में दो बैंक खाते खोले जाएंगे। एक खाते में ऋण की किस्त जमा की जाएगी। दूसरे खाते में योजना में मिलने वाली सब्सिडी का राशि सरकार जमा करेगी।
ऑनलाइन पोर्टल से करना होगा आवेदन
राज्य के पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ. अजमेर सिंह डोगरा ने कहा कि मिशन में योजना का लाभ उठाने के लिए बैंकों के पास ऑनलाइन पोर्टल से आवेदन करना होगा। राज्य पशुपालन विभाग आवेदन को मंजूर करके नेशनल लाइव स्टॉक मिशन के पास भेजेगा। इसके बाद मंजूरी भी ऑनलाइन ही मिलेगी।