प्रदेश सरकार ने अब सरकारी पैसे पर पीजी करने के बाद नौकरी से गायब होने वाले डाक्टरों से सख्ती से निपटने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके तहत करीब सौ से ज्यादा ऐसे डाक्टरों के लिए थर्ड पार्टी जांच के आदेश दिए गए हैं।
जांच रिपोर्ट आने के बाद सभी गायब डाक्टरों को नौकरी से बर्खास्त करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके बाद मंत्रिमंडल से मंजूरी मिलने के बाद सभी बर्खास्त डाक्टरों से बांड मनी को कानूनी कार्रवाई कर वसूलने का काम शुरू होगा। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग इस संबंध में प्रस्ताव बना रहा है जो अगली मंत्रिमंडल की बैठक में पेश किया जा सकता है।
दरअसल, सरकार हर साल बड़ी संख्या में डाक्टरों को सरकारी खजाने से चालीस से पचास लाख रुपये खर्च कर पोस्ट ग्रेजुएशन कराती है। इसके पीछे दलील यह होती है कि पीजी करने के बाद वह डाक्टर प्रदेश को सेवाएं देंगे जिससे प्रदेश की जनता को लाभ होगा। लेकिन पिछले कुछ समय में सौ से ज्यादा डाक्टर सरकारी खजाने के दम पर पीजी करने के बाद गायब हो गए।
यही नहीं बांड मनी को भी किसी डाक्टर ने नहीं चुकाया। ऐसे में आम जनता के पैसे से पीजी करने के बाद गायब होने की रवायत को खत्म करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कड़ा कदम उठाया है। इसके तहत वर्तमान में सरकारी दस्तावेजों में नौकरी में बने हुए ऐसे डाक्टरों को थर्ड पार्टी जांच के बाद बर्खास्त करने की तैयारी है।
साथ ही बर्खास्तगी के बाद विभाग इनके खिलाफ सिविल सूट कर बांड मनी वसूलने की कवायद शुरू करेगी। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि चूंकि प्रदेश सरकार और प्रदेश की जनता के साथ धोखाधड़ी है, ऐसे में उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी ताकि आगे यह परंपरा जारी न रह सके।