हिमाचल प्रदेश नहीं चाहता है कि केंद्रीय योजना आयोग का स्वरूप खत्म हो। पुराने स्वरूप में ही योजना आयोग काम करे। सात दिसंबर को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जब मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की मुलाकात होगी, उस समय प्रदेश सरकार की ओर से इस पक्ष को जोरदार तरीके से रखा जाएगा।
योजना आयोग के नए स्वरूप से हिमाचल प्रदेश जैसे पर्वतीय राज्यों को आर्थिक तौर पर क्षति होने की आशंका है। प्रदेश सरकार के बजट का एक बड़ा हिस्सा योजना आयोग के माध्यम से मिलता है, लेकिन नए स्वरूप में यह मदद केंद्र से शायद न मिल पाए। इससे हिमाचल को काफी अधिक क्षति होने की आशंका है।
प्रदेश सरकार को योजना के मद से 4100 करोड़ रुपये की वित्तीय मदद अब तक मिल रही थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से पत्र मिलने के बाद ही सरकार की ओर से होमवर्क शुरू कर दिया गया था, जिससे प्रधानमंत्री के सामने प्रदेश के मुख्यमंत्री विस्तार से अपनी बात को रख सकें।
इसके लिए सचिवालय के आला अफसरों की ओर से होमवर्क किया गया है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह खुद भी किसी नई संस्था के बदले योजना आयोग के पुराने स्वरूप को ही बनाए रखने के पक्ष में हैं।
योजना आयोग पर हिमाचल का रुख साफ है। प्रदेश सरकार पुराने स्वरूप को बनाए रखने की ही पैरवी करेगी। पुराने स्वरूप से हिमाचल को कोई नुकसान नहीं है।
- वीरभद्र सिंह, मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश