एचआरटीसी की तारादेवी वर्कशाप में दुर्घटनाग्रस्त बसों से टीन निकालकर जुगाड़ की खिड़कियां तैयार की जा रही हैं। वर्कशाप के लिए शीशों की सप्लाई न आने से यहां तैनात स्टॉफ को अधिकारियों ने टीन की खिड़कियां बनाने के निर्देश दे रखे हैं। वर्कशाप में पीजीआई शीट भी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में खिड़कियों के लिए कबाड़ से टीन निकाल कर काम चलाया जा रहा है।
एचआरटीसी वर्कशाप में इन दिनों रोजाना दर्जनों बसें टूटे शीशे बदलवाने के लिए पहुंच रही हैं। चालक जब खिड़की के लिए शीशा मांगते हैं तो स्टोर में शीशे न होने की बात कही जाती है। इसके बाद शुरू होती है शीशे की जगह टीन फंसाने की जद्दोजहद। वर्कशाप में पीजीआई शीट नहीं मिलती।
इसके बाद चालक और वर्कशाप स्टॉफ जंक यार्ड में पहुंच कर दुर्घटनाग्रस्त बसों से खिड़कियों के लिए टीन निकालते हैं। शीशे की जगह ठोक पीट कर टीन फंसा दी जाती है। बस की खिड़कियों पर लगी टीन से न तो सर्द हवाएं रुकती है और न ही धूल। मसलन बसों में सफर करने वालों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है।
मेरे नंबर पर व्हट्सएप करो फोटो: बाली
परिवहन मंत्री जीएस बाली ने अमर उजाला अभियान को गंभीरता से लेते हुए लोगों से बसों में शीशे न हो अथवा अन्य किसी भी अन्य प्रकार की समस्या से संबंधित फोटो उनके मोबाइल नंबर 98160-35297 पर व्हट्सऐप करने के लिए कहा है। उन्होंने एचआरटीसी अधिकारियों को तुरंत बसों में शीशे लगाने के निर्देश देने की भी बात कही है।
व्हट्सएप पर इन्होंने भेजी हमें फोटो
शिमला से रोहड़ू जा रही एचआरटीसी बस एचपी-68-4394 का शीशा टूटा होने से बस में धूल भर गई। यात्रियों को नाक मुंह ढक कर सफर करना पड़ा।
फोटो: सुशील शर्मा, कोटखाई
सवारियों ने शीशा पकड़ कर किया सफर
शिमला से कांगल की ओर जा रही एचआरटीसी बस एचपी-18ए 0391 के शीशों के लॉक टूटे होने के कारण यात्रियों को हाथ से शीशे पकड़ कर सफर करना पड़ा।