हिमाचल प्रदेश में बढ़ती चीनी की कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकार ने थोक और परचून विक्रेताओं के मुनाफे की सीमा तय कर दी है। थोक विक्रेता चीनी की बिक्री पर अधिकतम पांच फीसदी और परचून विक्रेता अधिकतम आठ फीसदी मार्जिन रख सकेंगे। कोई भी थोक कारोबारी 4,000 क्विंटल से अधिक चीनी का स्टॉक नहीं रख सकेगा। प्रदेश में इन दिनों चीनी करीब 70 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है। चीनी की लैंडिंग कॉस्ट 60 से 64 रुपये प्रति किलो पड़ रही है। चीनी की जमाखोरी न हो, इसके चलते सरकार ने जिला खाद्य नियंत्रक अधिकारियों को छापा मारने के आदेश दिए हैं।
उपभोक्ताओं को राहत देने और जमाखोरी व अत्यधिक मुनाफाखोरी पर अंकुश लगाने के लिए मार्जिन तय किए हैं। प्रदेश में चीनी की आपूर्ति करने वाले प्रमुख थोक विक्रेता सोलन, परवाणू, कंडाघाट, डमटाल और टुटू क्षेत्र में हैं। इनके माध्यम से प्रदेश के विभिन्न जिलों में परचून विक्रेताओं तक चीनी पहुंचती है। इसके अलावा मेगामार्ट जैसे बड़े कारोबारी प्रतिष्ठान भी थोक में चीनी की खरीद करते हैं। सरकार के आदेश के बाद खाद्य एवं आपूर्ति विभाग बाजार में चीनी की कीमतों और भंडारण पर नजर रखेगा।
निर्धारित सीमा से अधिक स्टॉक मिलने या तय मार्जिन से ज्यादा कीमत वसूलने वाले कारोबारियों पर कार्रवाई की जा सकती है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि आदेशों का उद्देश्य बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और आम उपभोक्ताओं को बढ़ती कीमतों से राहत देना है। व्यापारियों को अब खरीद मूल्य, लैंडिंग कॉस्ट और निर्धारित मार्जिन के अनुसार ही चीनी की बिक्री करनी होगी। सरकार को उम्मीद है कि इस व्यवस्था से बाजार में कीमतों पर नियंत्रण रहेगा और जमाखोरी की संभावना भी कम होगी। खाद्य आपूर्ति विभाग की निदेशक कुमुद सिंह ने बताया कि चीनी की जमाखोरी न हो, इसके चलते जिला अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। जिलों में अधिकारी कारोबारियों के गोदाम चेक कर रहे हैं।