स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव सुभाशीष पांडा ने कहा कि प्रदेश के सभी छह मेडिकल कॉलेजों में मरीजों को विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं दी जा रही हैं। ज्यादा से ज्यादा लोगों को समय रहते विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हों, इसके चलते अतिरिक्त डॉक्टर भेजे जाएंगे।
हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) और डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज टांडा के विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं अब बारी-बारी अन्य मेडिकल कॉलेजों में भी ली जाएंगी। यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि दोनों ही स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों की भीड़ को कम किया जा सके और लोगों को घरों से नजदीक विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं मिल सकें। चंबा, नाहन, हमीरपुर और नेरचौक मेडिकल कॉलेजों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है। ऐसे में हादसे में घायल व गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को उपचार के लिए शिमला या टांडा आना पड़ता है। इन लोगों को अब नजदीकी मेडिकल कॉलेज में ही विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं मिल सकेंगी।
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आईजीएमसी और टांडा में प्रतिदिन औसत 4,000 मरीज आते हैं। दोनों ही मेडिकल कॉलेजों के वार्ड मरीजों से भरे रहते हैं। हालात ऐसे हैं कि कई बार बिस्तर कम पड़ जाते हैं और मरीजों को स्ट्रेचर पर ही रखना पड़ता है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि अन्य चार मेडिकल कॉलेजों में भी आधारभूत ढांचा है। इनमें विशेषज्ञ डॉक्टर भी हैं लेकिन अतिरिक्त विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती से मरीजों को फायदा होगा। स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव सुभाशीष पांडा ने कहा कि प्रदेश के सभी छह मेडिकल कॉलेजों में मरीजों को विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं दी जा रही हैं। ज्यादा से ज्यादा लोगों को समय रहते विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हों, इसके चलते अतिरिक्त डॉक्टर भेजे जाएंगे।