कश्मीर घाटी में अब हिमाचल के फूल भी महकेंगे। नौणी विवि में लंबे शोध के बाद तैयार प्रजातियों को कश्मीर घाटी में उगाने की तैयारी चल रही है। इनका इस्तेमाल कश्मीर में व्यावसायिक तौर पर होगा।
ये वो प्रजातियां हैं, जो कश्मीर में आसानी से विकसित हो पाएंगी और इनका उत्पादन बेहद टिकाऊ होगा। नौणी में विकसित फूल घाटी के प्रसिद्ध ट्यूलिप व मुगल गार्डन की शोभा बढ़ाएंगे।
कश्मीर के ट्यूलिप गार्डन में इस प्रजाति के बहुत से फूल हैं, लेकिन विश्वविद्यालय ने पिछले कुछ सालों से फूलों की खेती पर शोध किए हैं। इससे ट्यूलिप की किस्म मजबूत हुई है। यही वजह है जो कश्मीर से विशेषज्ञों का दल यहां पहुंचकर शोध जानकारी जुटाने पहुंचा है।
ट्यूलिप के साथ डेफोडिल (पीले रंग का फूल) को कश्मीर के मुगल गार्डन में उतारने की तैयारी चल रही है। इन तैयारियों को सिरे चढ़ाने के लिए कश्मीर घाटी के सात विशेषज्ञ इन दिनों डॉ. यशवंत सिंह परमार उद्यानिकी और वानिकी विवि में फूलों की पौध और उसमें तैयार प्रजातियों का प्रशिक्षण ले रहे हैं।
ये सभी प्रशिक्षु कश्मीर के आलीशान गार्डन से जुड़े हैं और वहां खिले फूलों को हर मौसम झेलने लायक बनाने समेत दूसरे प्रदेश में उग रही किस्मों को गार्डन जोड़ने पर काम कर रहे हैं।
नौणी विवि की ओर से इन विशेषज्ञों को पांच दिन का प्रशिक्षण दिया गया है और प्रशिक्षण के बाद भी यह दल लगातार विवि विशेषज्ञों के संपर्क में रहेगा।
कश्मीर में बढ़ाएंगे फूलों की खेती : विशेषज्ञ
नौणी विवि में पहुंचे कश्मीर के इन अधिकारियों में इमरान अहमद, जावेद मासूद, मोहम्मद हुसैन, शकील अहमद, मजहर मुस्तफा, आसिफ अहमद, तोसिफ अहमद शामिल हैं।
ये सभी कश्मीर के मुगल गार्डन, सिटी गार्डन ऑफ कश्मीर, वेरीनाग गार्डन, अजवल बाग व ट्यूलिप गार्डन कश्मीर के सहायक फ्लोरिकलचर ऑफिसर के पद पर तैनात हैं और यहां लगातार फूलों की विभिन्न प्रजातियों को विकसित करने पर काम कर रहे हैं।
प्रशिक्षण के बारे में बारामूला में कार्यरत शकील अहमद ने बताया कि इस प्रशिक्षण से वो इस क्षेत्र में इस्तेमाल की जाने वाली सर्वोत्तम तकनीक के बारे में सीखकर कश्मीर में फूलों की खेती को बढ़ाने के लिए काम करेंगे।
किसी भी राज्य की सहायता को तैयार हैं : डॉ. वाईसी गुप्ता
डॉ. यशवंत सिंह परमार उद्यानिकी और वानिकी विश्वविद्यालय (यूएचएफ) नौणी में पांच दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान फ्लोरिकल्चर विभागाध्यक्ष डॉ. वाईसी गुप्ता, डॉ. राजेश भल्ला, डॉ. एसआर धीमान, डॉ. बीपी शर्मा, डॉ. पूजा, डॉ. भारती व डॉ. सुमन ने कश्मीर से आए विशेषज्ञों को प्रशिक्षण दिया है। भविष्य में भी इनके बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान होता रहेगा। डॉ. वाईसी गुप्ता ने बताया कि नौणी विवि प्रदेश से बाहर भी खोज को विकसित करने में तैयार है।