अंतिम पदोन्नत उम्मीदवार (उत्तम सिंह - क्रमांक 3926) की नियमित नियुक्ति वर्ष 2000 में हुई थी, जबकि याचिकाकर्ता की नियुक्ति 2002 की है। याचिकाकर्ता का वरिष्ठता क्रमांक 4892 है, जो अंतिम चयनित उम्मीदवार से 900 से अधिक स्थान पीछे है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता के इस तर्क को खारिज कर दिया कि विभाग की ओर से एसीआर (वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट) मंगवाए जाने से उन्हें पदोन्नति का पूर्ण अधिकार मिल जाता है। पीठ ने दोहराया कि कर्मचारी के पास केवल पदोन्नति पर विचार किए जाने का अधिकार होता है, पदोन्नति का कोई बाध्यकारी अधिकार नहीं। शिक्षा विभाग की रिपोर्ट के अनुसार रोस्टर के तहत अनुसूचित जाति श्रेणी में 28 पदों की कमी पाई गई थी।
इस श्रेणी के तहत वरिष्ठता क्रमांक 3926 तक के पात्र प्रवक्ताओं को ही पदोन्नत किया गया था। याचिकाकर्ता ने पदोन्नति सूची जारी होने के बाद विभाग के समक्ष कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई और सीधे अदालत का दरवाजा खटखटाया।
इस कारण एकल जज की ओर से याचिका को कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग मानते हुए खारिज कर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया। प्रवक्ता सतपाल सिंह चौहान ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर 28 फरवरी 2026 को जारी प्रिंसिपल पदोन्नति आदेश को यह कहकर चुनौती दी थी कि इसमें केवल अनुसूचित जाति श्रेणी के उम्मीदवारों को पदोन्नत किया गया है। एकल जज ने 15 जून 2026 को याचिका को भारी जुर्माने के साथ खारिज कर दिया था। खंडपीठ ने भी सिंगल जज के फैसले में हस्तक्षेप करने से इन्कार करते हुए याचिकाकर्ता की अपील को पूरी तरह खारिज कर दिया।