हिमाचल में सियासी खो-खो का सिलसिला भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष खीमी राम के कांग्रेस में जाने से शुरू हुआ। भाजपा ने चार विधायकों को अपने पक्ष में कर लिया। पहले दो निर्दलीय विधायक होशियार सिंह और प्रकाश राणा को मिलाया। उसके बाद कांगड़ा से कांग्रेस विधायक पवन काजल और नालागढ़ से लखविंद्र राणा से कांग्रेस छुड़ाई। पवन काजल भी कांग्रेस के कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष थे। इसके बाद देहरा के पूर्व विधायक रहे योगराज भी भाजपा में शामिल किए। ठियोग से पूर्व भाजपा विधायक राकेश वर्मा की पत्नी इंदु वर्मा पहले ही भाजपा में चली गई थीं। अब दूसरे कार्यकारी अध्यक्ष हर्ष महाजन को अपने साथ मिलाकर कांग्रेस ने बड़ा तीर मारा है। सूत्रों के अनुसार भाजपा की नजर अब हमीरपुर, सिरमौर और कांगड़ा जिलों के इसी स्तर के तीन कांग्रेस नेताओं पर भी है। इनसे संवाद कभी भी सिरे चढ़ सकता है।
प्रतिभा-विक्रमादित्य से वीरभद्र जैसे संबंध नहीं रह गए थे
पिछले विधानसभा चुनाव में तो हर्ष महाजन पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह के निजी आवास हॉलीलॉज शिमला मेें ही कैंप लगाए बैठे थे, मगर उनके कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह और उनके बेटे शिमला ग्रामीण के कांग्रेस विधायक विक्रमादित्य सिंह से वैसे संबंध नहीं गए थे, जैसे वीरभद्र सिंह के साथ रहे थे। सूत्रों के अनुसार हाल ही में हर्ष महाजन और एक अन्य गुट के नेताओं में हॉलीलॉज में ‘तू-तू, मैं-मैं’ तक हो गई थी। हर्ष महाजन के बाद उनके खेमे में जुडे़ कई कांग्रेस नेता भी भाजपा में जा सकते हैं।