मंत्रालय केा भेजा मॉडल
संस्थान ने साॅफ्टवेयर का मॉडल तैयार करने के बाद इसे सेंसर के साथ अटैच करने व स्थापित करने की मंजूरी के लिए पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय भारत सरकार को मॉडल भेजा है। जीबी पंत राष्ष्ट्रीय हिमालय पर्यावरण संस्थान मौहल इस प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय हिमालय अध्ययन मिशन के तहत कर रहा है। पिछले एक दशक हिमालय क्षेत्र में बादल फटने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में कुल्लू जिला में भी बादल फटने से भारी तबाही हो रही है।
बादल फटने से हो रही भारी तबाही
इसमें जानमाल के साथ करोड़ों की सरकारी व निजी संपत्ति को भारी नुकसान हो रहा है। बादल फटने से जानमाल का नुकसान कम हो, इसके लिए जीबी पंत पर्यावरण संस्थान मौहल अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने का जा रहा है। संस्थान के निदेशक ई राकेश कुमार सिंह ने कहा कि अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने की प्रक्रिया चल रही है। बंगलूरू में सॉफ्टवेयर मॉडल बनकर तैयार है। उन्होंने बताया कि अब इस मॉडल को सेंसर के साथ अटैच करने व स्थापित करने के लिए केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को मंजूरी के लिए भेजा है।