डल झील की परिक्रमा करने के बाद सोमवार दोपहर को शिव चेलों ने डल तोड़कर (लांघ कर) पार किया। डल तोड़ने से पहले कार्तिक स्वामी के चेले ने शिव चेलों की अगुवाई की। शिव चेलों के डल में उतरते ही श्रद्धालुओं ने हर हर महादेव के जयकारे लगाकर माहौल को भक्तिमय बना दिया।
कई श्रद्धालु डल के दूसरी तरफ से चेलों को कंधे पर उठाकर उनके आसन स्थल तक लाए। इसके बाद श्रद्धालुओं ने शिव चेलों से आशीर्वाद लिया। साल में एक बार ही ऐसा नजारा देखने को मिलता है। राधाष्टमी के दिन इस नजारे को देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु डल झील पहुंचते हैं।
डल झील पर एकसाथ चतुर्मुखी शिवलिंग के पास चरपटनाथ के चिह्न, दशनामी अखाड़े की छड़ी और संचूई के शिव चेलों ने मणिमहेश यात्रा पर आए शिव भक्तों को आशीर्वाद दिया। शिव चेलों के डल झील तोड़ने के बाद जम्मू-कश्मीर से आए शिव भक्तों ने झील में आस्था की डुबकी लगाई।
डल झील में पवित्र स्नान करने के बाद श्रद्धालु लौट गए। जिला प्रशासन ने मणिमहेश यात्रा पर सिर्फ रस्में निभाने वाले श्रद्धालुओं को ही जाने की अनुमति दी थी, लेकिन रविवार को अधिकतर श्रद्धालु बिना अनुमति ही मणिमहेश यात्रा पर निकल गए और पवित्र डल झील में स्नान कर पुण्य कमाया।
आम श्रद्धालु सोमवार को डल झील में डुबकी लगाने के बाद लौट आए, जबकि शिव चेले सोमवार रात को डल झील पर ही रुकेंगे। ये मंगलवार सुबह पूजा-अर्चना के बाद वापसी करेंगे। वहीं, उपमंडल अधिकारी भरमौर मनीष कुमार सोनी भी सोमवार को मणिमहेश के लिए रवाना हो गए।