दो कंपनियों को टेंडर देने और खरीद के लिए पांच करोड़ का बजट बढ़ने से मामला विवादित हो गया है। 22 अगस्त को विधानसभा में कांग्रेस ने भी इसको लेकर खूब हंगामा किया था। लैपटॉप खरीद का जिम्मा राज्य इलेक्ट्रानिक कॉरपोरेशन को दिया गया है।
उच्च शिक्षा निदेशालय ने खरीद के लिए करीब 18 करोड़ का बजट निर्धारित किया था, जबकि टेंडर में चुनी गई कंपनियों ने 23 करोड़ के बजट में लैपटॉप देने की बात कही। कॉरपोरेशन ने लैपटॉप खरीद के लिए पहली बार दो कंपनियों का चयन किया।
एल वन कंपनी को 60 फीसदी और एल टू कंपनी को 40 फीसदी सप्लाई ऑर्डर देने की बात कही गई। कॉरपोरेशन की टेंडर प्रक्रिया शिक्षा विभाग को रास नहीं आई है। इससे पूर्व टेंडर प्रक्रिया की टेक्निकल बिड में भी पेच फंसा था।
टेंडर में दिए गए तय मानक पूरे नहीं करने के आरोप में बाहर हुई कंपनी ने टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठाए। इन सब चीजों को आधार बनाते हुए शिक्षा विभाग ने टेंडर रद्द करने का प्रस्ताव तैयार किया है।