राज्य में अवैध भवनों को नियमित करने का रास्ता साफ हो गया है। मंगलवार को मंत्रिमंडल की बैठक में शहरी एवं नगर नियोजन (संशोधित) विधेयक को शीतकालीन सत्र में पेश करने को मंजूरी मिल गई है।
बीते सप्ताह मंत्रिमंडल की बैठक में प्रदेश सरकार ने इस प्रस्ताव को वापस कर दिया था। आनन फानन में इस संशोधित विधेयक को सत्र में लाने के लिए अब मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी प्रदान की गई है।
संशोधित विधेयक में टीसीपी एरिया में घर नियमित कराने की फीस 70 फीसदी जबकि नगर निगम एरिया में 60 फीसदी कम करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
टीसीपी दायरे में घर की ग्राउंड फ्लोर नियमित कराने के लिए 400 रुपये प्रति वर्ग मीटर और अन्य मंजिलें नियमित कराने के लिए 200 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से राशि वसूली जाएगी। नगर निगम शिमला के एरिया में ग्राउंड फ्लोर 800 रुपये और अन्य मंजिलें 400 रुपये प्रति वर्ग मीटर शुल्क की दर के हिसाब से नियमित होंगे।
प्रदेश सरकार ने प्रस्ताव में 70 फीसदी अवैध भवनों को नियमित करने का फैसला लिया है। 6 मंजिल तक भवनों को नियमित किया जाना है। इसमें भवन मालिकों को दो मंजिल पार्किंग तक की छूट दी गई है।
जिन भवन मालिकों ने पूर्व में आई पॉलिसी के तहत अपने भवन नियमित करा दिए हैं, इसके बाद अगर इन भवन मालिकों ने अतिक्रमण किया है तो ये मान्य नहीं होगा।
प्रदेश सरकार से विधेयक को मंजूरी के लिए मंत्रिमंडल की बैठक बुलाई थी। प्रदेश सरकार ने लोगों के अवैध भवनों को नियमित करने का आश्वासन दिया था।
विधायकों ने भवन नियमित करने बारे प्रश्न भी लगाए थे। धर्मशाला में होने जा रहे शीत सत्र में विपक्ष इन मुद्दों पर सत्ता पक्ष को न घेरे, इसके चलते सरकार ने इस संशोधित विधेयक को शीत सत्र में लाने के लिए बैठक में इसे मंजूरी दे दी।
प्रदेश सरकार ने कोर एरिया में अवैध निर्माण को नियमित करने को मंजूरी प्रदान की है जबकि ग्रीन और हेरिटेज एरिया में कंस्ट्रक्शन की अनुमति नहीं होगी। इन एरिया में अनाधिकृत भवनों को नियमित नहीं किया जा सकता है।