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Himachal Budget: विशेषज्ञ बोले- क्षमताओं को ध्यान में रख कर बनाई भविष्य की योजना, खुशहाल होंगे किसान

Sun, 18 Feb 2024 05:00 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, धर्मशाला/पालमपुर (कांगड़ा)/शिमला

सार

बजट में सस्टेनेबल डेवलपमेंट (टिकाऊ विकास) का लक्ष्य रखते हुए लोक कल्याण और आर्थिक विकास को संतुलित करने का प्रक्रिया प्रयास करता दिखाई देता है। 
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प्रो. अशोक सरियाल, डॉ. इंद्रवीर सिंह व प्रो. एनके शारदा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने वर्ष 2024-25 का बजट पेश किया है। इस बजट का अनुमानित व्यय 58.444 करोड़ रुपये है। बजट में सस्टेनेबल डेवलपमेंट (टिकाऊ विकास) का लक्ष्य रखते हुए लोक कल्याण और आर्थिक विकास को संतुलित करने का प्रक्रिया प्रयास करता दिखाई देता है। वर्ष 2023-24 में हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था में 7.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई। राज्य का कुल सकल घरेलू उत्पाद बढ़कर 20.7 लाख करोड़ रुपये हो गया। मौजूदा बजट में सरकार का उद्देश्य अपनी मौजूदा क्षमताओं को ध्यान में रखते हुए भविष्य के लिए योजना बनाना लग रहा है। यह समीक्षा हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र विभाग के सहायक आचार्य डॉ. इंद्रवीर सिंह ने की है। उन्होंने कहा कि बजट में कृषि क्षेत्र पर विशेष जोर दिया गया है। प्राकृतिक खेती से उगाई 20 क्विंटल अनाज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य सुनिश्चित करके प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया गया है। गाय और भैंस के दूध पर भी न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाकर 45 और 55 रुपये प्रति लीटर कर दिया है। इसके अलावा बजट में नवीकरणीय ऊर्जा, पर्यटन और स्वास्थ्य पर भी पर्याप्त ध्यान दिया गया है।

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बजट 2024-25 में शिक्षा के आधुनिकीकरण की तरफ एक बड़ा प्रयास किया है। मुख्यमंत्री ने शिक्षा के लिए 9,560 करोड़ के बजट का प्रस्ताव रखा। राज्य में 5-3-3-4 शिक्षा प्रणाली लागू होगी। राज्य में तीन साल का प्री-स्कूल पाठ्यक्रम भी विकसित करेगा। इसके लिए वित्तीय वर्ष 2024-25 में छह हजार प्री-प्राइमरी शिक्षकों की भर्ती की जाएगी। यह एक सही दिशा में कदम है। इससे निजी और सरकारी स्कूलों के बीच बढ़ती दूरी कम होगी। हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय में एमए अर्थशास्त्र की छात्रा मनीषा ने अपने खोज कार्य में निजी स्कूलों और आंगनबाड़ियों में समान उम्र के बच्चों के बीच सीखने में अंतर पाया है। सरकारी स्कूल के विद्यार्थी अब कक्षा एक से अंग्रेजी पढ़ पाएंगे। यह भी एक स्वागत योग्य कदम है। अंग्रेजी वैश्विक स्तर पर संवाद करने की एक भाषा है और कम उम्र में भाषा सीखना आसान है। यह कदम ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद होगा। सरकार ने दिव्यांगों के लिए उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने की भी घोषणा की है। यह एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे दिव्यांगों को आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी। बजट 2024-25 में 850 शैक्षणिक संस्थानों को स्मार्ट कक्षाओं और अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ इंस्टीट्यूट ऑफ़ एक्सीलेंस में बदलने की योजना है। इसके अलावा सरकार ने पढ़ो हिमाचल के तहत 500 शैक्षणिक संस्थानों में वाचनालय बनाने और सभी जिलों, उपमंडलों और पंचायतों में पुस्तकालय स्थापित करने की योजना भी बनाई है। ये आधुनिक शिक्षा प्रणाली की दिशा में उठाए गए महत्वपूर्ण कदम हैं, जो छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करेंगे।

कृषि विवि पालमपुर के पूर्व कुलपति एवं कृषि विशेषज्ञ प्रो. अशोक सरियाल ने कहा कि बजट में 680 करोड़ की राजीव गांधी प्राकृतिक खेती स्टार्टअप योजना से किसानों को जोड़ना सरकार का अच्छा प्रयास है। बजट में सरकार ने प्राकृतिक खेती के लिए जो घोषणा की है, वह सराहनीय कदम है। इससे किसान खुशहाल होंगे और जमीन जहर मुक्त भी होगी। कृषि विवि ने प्राकृतिक खेती की पहले ही शुरुआत की है, जिसके अच्छे परिणाम आए हैं। प्राकृतिक खेती से किसान की आर्थिकी मजबूत होगी। लेकिन सरकार को इस मुहिम को ठोस तरीके से धरातल पर उतारना होगा। 2018 में पिछली भाजपा सरकार ने प्राकृतिक खेती के लिए तीन करोड़ बजट से शुरू किया था। जबकि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद से भी बीस करोड़ इस प्रोजेक्ट के लिए मंजूर किया था। लेकिन अब राजीव गांधी प्राकृतिक खेती से 36 हजार किसानों को जोड़ना सुक्खू सरकार का अच्छा कदम है। इससे किसान आत्मनिर्भर बनेंगे। सरकार प्राकृतिक खेती से पैदा हुए गेहूं को 40 रुपये और मक्की 30 रुपये प्रति किलो किसानों से खरीद करेगी। यह सरकार की अपनी तरह की अनाज खरीद की गारंटी है। इससे प्रेरित होकर और किसान भी जुडेंगे।

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आर्थिक तंगहाली में, हर वर्ग कुछ न कुछ देने का प्रयास: प्रो. एनके शारदा
शिमला। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के इस बजट में विकास को गति देने की दिशा में कोई प्रभावी कदम उठाने का प्रस्ताव नहीं है। बजट में खिलाड़ियों, पुलिस बलों, दिहाड़ीदारों, आंगनबाड़ी वर्कर, कर्मचारियों युवाओं को कुछ न कुछ घोषणा कर खुश करने का प्रयास जरूर किया गया है, लेकिन प्रदेश की खराब माली हालत को देखते हुए बड़ी महत्वकांक्षी, पूंजीगत निवेश को लेकर कोई घोषणा नहीं है। पूंजीगत निवेश और रोजगार के अंतर संबद्ध है, निवेश होने पर ही रोजगार के नए अवसर सृजित होते हैं। ढांचागत विकास को मजबूत करने को उठाए गए कदम नाकाफी हैं। बजट में रोजगार के नए अवसर सृजित करने के लिए दी गई गारंटियों के अनुसार नाममात्र प्रस्ताव हैं। बजट में बेरोजगारी और महंगाई की गंभीर समस्या से निपटने के लिए कोई कारगर कदम उठाने की बात नहीं है। यह महंगाई को बढ़ाने वाला बजट साबित होगा। इसमें राजस्व और राजकोषीय घाटे की भरपाई को कोई मार्ग नही सुझाया गया है। मनरेगा में दिहाड़ी बढ़ाकर दिहाड़ीदारों को थोड़ी राहत जरूर दी गई है। कर्मचारियों पेंशनरों को एरिया भुगतान मार्च से शुरू करने और महंगाई भत्ते की किस्त पहली अप्रैल से देने का प्रस्ताव आगामी चुनावों को देखकर लिया है, जो सकारात्मक कदम कहा जा सकता है। इस बजट में सरकार ने किसान, बागवानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से कुछ योजनाओं की बात की है, यह नाकाफी रहेगी। बजट में कुछ विभागों के रिक्त पदों को भरने की बात की गई है, जो प्रदेश की बढ़ी बेरोजगारी से निपटने के लिए नाकाफी है। सरकार के बजट में प्रदेश को आत्म निर्भर बनाने की बात जरूर है, लेकिन प्रदेश के आय स्रोत कैसे बढ़ेंगे, उसके लिए क्या कदम उठाए जाएंगे, इसको लेकर कोई विशेष उल्लेख नहीं है। तंगहाली और बंधे हाथ के साथ इस बजट में बड़ी घोषणाओं से परहेज किया गया है।
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बजट प्रगतिशील पर एमएसपी की अनदेखी : डाॅ. विजय
कृषि एवं बागवानी के लिहाज से प्रदेश सरकार का बजट प्रगतिशील है। कृषि, बागवानी, पशुपालन और मत्स्य पालन योजनाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है। प्राकृतिक खेती के लिए किसानों को गेंहू और मक्की पर एमएसपी देने की घोषणा से प्रोत्साहन मिलेगा। गाय और भैंस के दूध पर न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने से दुग्ध उत्पादकों को लाभ होगा। हालांकि, सेब और टमाटर (अतिरिक्त उत्पादन वाली फसलें) के लिए किसानों को न्यूनतम बिक्री मूल्य का कोई उल्लेख नहीं है। जिन छोटे किसानों के पास 100 बक्से उत्पादन या 5 बीघे से कम भूमि है, उन्हें नई योजना के रूप में वार्षिक आजीविका के लिए पारिवारिक समर्थन मिल सकता था। बागवान बढ़ती लागत कीमतों से राहत के लिए कार्टन और बागवानी सहायक उत्पादों पर अनुदान की उम्मीद लगाए बैठे थे। इसे लेकर सरकार को विचार करना चाहिए।- डाॅ. विजय सिंह ठाकुर, पूर्व वीसी, नौणी विश्वविद्यालय
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