आर्थिक तंगहाली में, हर वर्ग कुछ न कुछ देने का प्रयास: प्रो. एनके शारदा
शिमला। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के इस बजट में विकास को गति देने की दिशा में कोई प्रभावी कदम उठाने का प्रस्ताव नहीं है। बजट में खिलाड़ियों, पुलिस बलों, दिहाड़ीदारों, आंगनबाड़ी वर्कर, कर्मचारियों युवाओं को कुछ न कुछ घोषणा कर खुश करने का प्रयास जरूर किया गया है, लेकिन प्रदेश की खराब माली हालत को देखते हुए बड़ी महत्वकांक्षी, पूंजीगत निवेश को लेकर कोई घोषणा नहीं है। पूंजीगत निवेश और रोजगार के अंतर संबद्ध है, निवेश होने पर ही रोजगार के नए अवसर सृजित होते हैं। ढांचागत विकास को मजबूत करने को उठाए गए कदम नाकाफी हैं। बजट में रोजगार के नए अवसर सृजित करने के लिए दी गई गारंटियों के अनुसार नाममात्र प्रस्ताव हैं। बजट में बेरोजगारी और महंगाई की गंभीर समस्या से निपटने के लिए कोई कारगर कदम उठाने की बात नहीं है। यह महंगाई को बढ़ाने वाला बजट साबित होगा। इसमें राजस्व और राजकोषीय घाटे की भरपाई को कोई मार्ग नही सुझाया गया है। मनरेगा में दिहाड़ी बढ़ाकर दिहाड़ीदारों को थोड़ी राहत जरूर दी गई है। कर्मचारियों पेंशनरों को एरिया भुगतान मार्च से शुरू करने और महंगाई भत्ते की किस्त पहली अप्रैल से देने का प्रस्ताव आगामी चुनावों को देखकर लिया है, जो सकारात्मक कदम कहा जा सकता है। इस बजट में सरकार ने किसान, बागवानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से कुछ योजनाओं की बात की है, यह नाकाफी रहेगी। बजट में कुछ विभागों के रिक्त पदों को भरने की बात की गई है, जो प्रदेश की बढ़ी बेरोजगारी से निपटने के लिए नाकाफी है। सरकार के बजट में प्रदेश को आत्म निर्भर बनाने की बात जरूर है, लेकिन प्रदेश के आय स्रोत कैसे बढ़ेंगे, उसके लिए क्या कदम उठाए जाएंगे, इसको लेकर कोई विशेष उल्लेख नहीं है। तंगहाली और बंधे हाथ के साथ इस बजट में बड़ी घोषणाओं से परहेज किया गया है।
बजट प्रगतिशील पर एमएसपी की अनदेखी : डाॅ. विजय
कृषि एवं बागवानी के लिहाज से प्रदेश सरकार का बजट प्रगतिशील है। कृषि, बागवानी, पशुपालन और मत्स्य पालन योजनाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है। प्राकृतिक खेती के लिए किसानों को गेंहू और मक्की पर एमएसपी देने की घोषणा से प्रोत्साहन मिलेगा। गाय और भैंस के दूध पर न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने से दुग्ध उत्पादकों को लाभ होगा। हालांकि, सेब और टमाटर (अतिरिक्त उत्पादन वाली फसलें) के लिए किसानों को न्यूनतम बिक्री मूल्य का कोई उल्लेख नहीं है। जिन छोटे किसानों के पास 100 बक्से उत्पादन या 5 बीघे से कम भूमि है, उन्हें नई योजना के रूप में वार्षिक आजीविका के लिए पारिवारिक समर्थन मिल सकता था। बागवान बढ़ती लागत कीमतों से राहत के लिए कार्टन और बागवानी सहायक उत्पादों पर अनुदान की उम्मीद लगाए बैठे थे। इसे लेकर सरकार को विचार करना चाहिए।- डाॅ. विजय सिंह ठाकुर, पूर्व वीसी, नौणी विश्वविद्यालय