वर्ष 2022-23 बजट पेश करते हुए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर सदन में विपक्ष पर शायराना अंदाज में तंज कसते हुए नजर आए। सीएम ने शुरू में ही यह शे‘र पढ़ा-मिट्टी से कुछ ख्वाब उगाने आया हूं, मैं धरती का गीत सुनाने आया हूं, चार दीये तेरी दहलीज पर है रोशन, एक दीया मैं और जलाने आया हूं। विधायक ऐच्छिक निधि को 10 लाख से बढ़ाकर 12 लाख रुपये करने पर भी मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा- लहरों की खामोशी को समंदर की बेबसी न समझ, जितनी गहराई अंदर है, बाहर उतना तूफान बाकी है। शे‘र पढ़ते हुए मुख्यमंत्री ने नेता प्रतिपक्ष को कहा-मुकेश जी, सितारे तोड़ते हुए जमीन न तोड़ना। मुख्यमंत्री सदन में बोले कि वह किसान भाइयों का आह्वान करते हैं-आओ मिलकर मुट्ठी बांधें, धरती का शृंगार करें, खेतों में हरियाली रोपें, समृद्धि का संचार करें।
वृद्धावस्था पेंशन के लिए पात्रता की आयु सीमा को घटाकर 60 वर्ष करने का एलान करते हुए जयराम ने यह शे’र पढ़ा-जहां सजदा हो बुजुर्गों का वहां की तहजीब अच्छी है, जहां लांघे न कोई मर्यादा, वो दहलीज अच्छी है। एक अन्य शे‘र भी पढ़ा - सबकी दुआओं को दिल में उतारना है, हमको तो हर घर का चूल्हा संवारना है। छात्रों के लिए कॅ रियर परामर्श और मार्गदर्शन प्रकोष्ठ खोलने का एलान करते हुए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने यह शे‘र पढ़ा-किताब और कलम हर बच्चे की तकदीर बदलेगी, ज्ञान की ज्योति हिमाचल की तस्वीर बदलेगी। कौशल आपके द्वार नाम से नई योजना की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने यह शे‘र पढ़ा - जिसमें कौशल होगा, वही कुशल होगा, कौशल के दम पर ही वह सफल होगा।
लकड़ी के 20 हजार खंभों को लोहे के खंभों में बदलने की घोषणा के साथ मुख्यमंत्री ने यह शे‘र पढ़ा - कुछ नहीं होगा अंधेरों को बुरा कहने से, अपने हिस्से का दीया खुद ही जलाना होगा। नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री और विपक्ष के अन्य विधायकों की ओर इशारा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सोचने से कहां मिलते हैं तमन्नाओं के शहर, चलना भी जरूरी है, मंजिल पाने के लिए। सीएम ने इसके बाद यह शे‘र पढ़ा - मुश्किलें कितनी भी हों सामने हमारे, हिम्मत हो तो रास्ता जरूर निकलता है। एक अन्य शे‘र प्रस्तुत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा -उनका यही है दावा कि सूरज उन्हीं का है, मेरी यह जिद्द है कि सबको एक ही धूप मिले।
आवास योजनाओें में नए मकान बनाने की घोषणा करते हुए सीएम ने कहा - ख्वाब देखे हैं, हौसले भी जिंदा हैं, हम वो हैं जिनसे मुश्किलें भी शर्मिंदा हैं। विभिन्न श्रेणियों के लिए मानदेय की घोषणा करते हुए यह शे‘र पढ़ा - हम हर एक का दर्द सीने में ले के चलते हैं, सबके दामन को खुशियों से भरते हैं, यही चाहते हैं न रहे कोई जरूरतमंद, दिन-रात सबके सपनों को पूरा करते हैं। बजट भाषण का समापन मुख्यमंत्री ने इस शे‘र से किया - जो रुक गया उसे क्या मुश्किलों से, जो चलेगा उसी के पांवों में छाला होगा, औरों का दर्द होना चाहिए सीने में, जो जलेगा उसी दीये से उजाला होगा। मुख्यमंत्री ने आस्ट्रेलिया के एक पर्यावरणविद् रॉबर्ट जेम्स ब्राउन का उदाहरण देते हुए पर्यावरण संरक्षण की भी चिंता जताई कि भविष्य या तो हरा होगा या तो नहीं होगा।