विधानसभा में विपक्ष ने किया वाकआउट।
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हिमाचल प्रदेश विधानसभा में मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को कांग्रेस विधायकों ने प्रश्नकाल से पहले पूर्व सांसद रामस्वरूप शर्मा की संदिग्ध मौत पर सीबीआई जांच करवाने की मांग उठाते हुए खूब हंगामा किया। सीबीआई जांच पर अड़ी कांग्रेस ने नियम 67 में सारा काम रोककर स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा मांगी। हिमाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष के इंकार करने पर कांग्रेस विधायकों ने वेल में आकर नारेबाजी की। विपक्ष ने सरकार से जांच का आश्वासन न मिलने और स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा के नामंजूर होने पर सदन से वाकआउट कर दिया।
इसके बाद प्रश्नकाल कांग्रेस विधायकों की अनुपस्थिति में हुआ। माकपा विधायक राकेश सिंघा ने प्रश्नकाल में सवाल पूछे। कार्यवाही सुबह 11 बजे जैसे ही शुरू हुई, विपक्षी सदस्यों ने प्रश्नकाल को बाधित कर दिया। करीब 20 मिनट सदन में पूर्व सांसद की संदिग्ध मौत के मामले में दोनों पक्षों में तीखी नोकझोंक हुई। संसदीय कार्य मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि बिना नियम बोला नहीं जा सकता। इस पर कांग्रेस विधायक और भड़क उठे।
नेता विपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि 18 लाख लोगों के प्रतिनिधि की मौत पर सरकार पर्दा डालने का प्रयास कर रही है। मुकेश ने कहा कि फिल्म अभिनेता सुशांत राजपूत की मौत पर पूरे देश में शोर मचता है, जबकि सांसद की मौत की सरकार सीबीआई जांच नहीं करवाना चाहती। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने कहा था कि अगर सांसद के परिवार से जांच की मांग की जाएगी तो जांच करवाएंगे। अब दिवंगत सांसद के पुत्र ने जांच की मांग की है।
किन्नौर से कांग्रेस विधायक जगत सिंह नेगी ने कहा कि हम चार माह से चुप बैठे हैं। इतने समय में सारे साक्ष्य खत्म कर दिए जाएंगे। इस पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि रामस्वरूप शर्मा मंडी से थे और उनके ही दल से संबंधित थे। उनकी मृत्यु के बाद वह बहुत विचलित हुए। यह दुखद देहांत दिल्ली में हुआ है। मामला राज्य के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। दिल्ली में जांच की प्रक्रिया जारी है। वह उनके परिवारवालों से भी मिले हैं।
परिजनों ने जांच की बात नहीं कही है। सारे मामले से भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को भी अवगत कराया गया है। सीएम ने कहा कि महज एक बयान उनके बेटे की ओर से मीडिया में आया है। इस बारे में वह कुछ और करवाना चाहते हैं तो सरकार उनका साथ देगी। विधानसभा अध्यक्ष विपिन सिंह परमार ने कहा कि नियम 67 के तहत दिया गया स्थगन प्रस्ताव अस्वीकार किया जाता है। विधानसभा की अपनी गरिमा है। यहां पर सार्थक चर्चा होती है। इसके बाद भी कांग्रेस विधायक शांत नहीं हुए और वाकआउट कर दिया।