मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने शुक्रवार को अर्की विधानसभा क्षेत्र से नामांकन दाखिल किया। कांग्रेस के कई दिग्गज और टिकट के तलबगार रहे नेता इस मौके पर सीएम के साथ मौजूद रहे। अर्की में कांग्रेसियों ने फूल माला पहनाकर व तिलक लगाकर मुख्यमंत्री का स्वागत किया। उन्होंने दोपहर करीब 12 बजे नामांकन दाखिल किया।
पत्रकारों से बातचीत में सीएम ने कहा कि अर्की में गुटबाजी को खत्म करने के लिए उन्होंने यहां से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है। यहां कांग्रेस कार्यकाल में भारी विकास कार्य हुए लेकिन इन विकास कार्यों को लोगों तक पहुंचाने की जगह कांग्रेस नेता आपस में ही उलझ गए थे। इसकी वजह से पिछले दो चुनाव में कांग्रेस को यहां से हार का मुंह देखना पड़ रहा था।
कांग्रेस अब उनके यहां आने से एक छत के नीचे आ गई है। सभी नेता मिलकर चुनाव लड़ेंगे और एक बार फिर से कांग्रेस की सरकार बनाने में मदद करेंगे। वीरभद्र सिंह ने कहा कि ऐसी गाड़ी कामयाब नहीं हो सकती जिसके पांच-पांच चालक हों। बकौल, वीरभद्र सिंह उन्होंने अपने कार्यकाल में जंगल की रक्षा करते हुए माफिया राज को खत्म किया है।
हिमाचल प्रदेश में बड़े पैमाने पर औद्योगिकरण किया गया ताकि बेरोजगारों को रोजगार मिल सके। ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 137 डिग्री कॉलेज और बड़ी संख्या में स्कूल खोले हैं। बेराजगारी भत्ता देने वाला हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य है। उनकी सरकार ने कौशल विकास भत्ता के तहत तकनीकी प्रशिक्षण लेने वाले युवाओं को 1000 रुपये और शारीरिक रूप से अपंग प्रशिक्षुओं को 1500 रुपये महीना देना शुरू किया।
उन्होंने कहा कि उनके लिए पूरा प्रदेश एक है। वे क्षेत्रवाद में विश्वास नहीं करते हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग जाति व धर्म के नाम पर देश को बांटने की कोशिश करते हैं उससे देश का कभी भला नहीं हो सकता है।
वीरभद्र सिंह ने नामांकन दाखिल करने से पूर्व अर्की में कांग्रेस कार्यालय का उद्घाटन भी किया। इस अवसर पर युवा कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष विक्रमादित्य सिंह, कोऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष हर्ष महाजन, पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह, जिलाध्यक्ष राहुल ठाकुर आदि मौजूद रहे।