प्रदेश में सत्ता पर काबिज होने के लिए भाजपा ने नए चेहरों पर दांव खेला है तो कांग्रेस पुराने चेहरों के भरोसे है। चुनावी समर में 21 नए चेहरों को उतारने वाली भाजपा की टक्कर में कांग्रेस ने 10 को मौका दिया है। वीरभद्र सिंह की कमान में 31 विधायकों को मौका देने वाली कांग्रेस ने सांसद विप्लव ठाकुर, नीरज की जगह चंद्र कुमार, गंगूराम मुसाफिर, हरभजन सिंह भज्जी जैसे अनुभवी उतारे हैं।
रिटायरमेंट की तैयारी कर चुकीं विद्या स्टोक्स और बृज बिहारी लाल बुटेल पर दोबारा उतरने का दबाव है। दूसरी तरफ , भाजपा ने जिताऊ प्रत्याशियों की तलाश में पुराने चेहरों को थकाऊ और उबाऊ मान चार सिटिंग विधायकों का पत्ता साफ कर दिया। संघ, विद्यार्थी परिषद और यहां तक कि कांग्रेस की पृष्ठभूमि वाले नए चेहरों को तरजीह दी।
दिग्गज धूमल-शांता की नाराजगी से लेकर बगावत की आशंका को दरकिनार किया गया। हालांकि अभी कांग्रेस 9 सीटों पर नाम तय करेगी, लेकिन मौजूदा सियासी हालात बयां कर रहे हैं कि मुकाबला नई भाजपा और पुरानी कांग्रेस के बीच ही रहेगा।
9 नवंबर को होने वाले मतदान के लिए दोनों प्रमुख राजनीतिक दल एक-दूसरे से बिल्कुल अलग रणनीति के साथ उतरने जा रहे हैं। आचार संहिता के बाद प्रत्याशी सूची जारी कर दोनों दलों ने अपने इरादे स्पष्ट कर दिए हैं। टिकट तय करने में दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व ने मैराथन मंथन के बाद कई प्रत्याशियों के चयन से चौंका दिया।
राहुल गांधी ने वीरभद्र को चुनावी कमान सौंपने के बाद भी अपना दखल रखा है। ठियोग के मुकाबले वीरभद्र की दूसरी पसंद अर्की विधानसभा से मौका दिया। 20 अक्तूबर को ठियोग में नामांकन दाखिल करने का दावा कर चुके वीरभद्र को अर्की में पर्चा दाखिल करना पड़ा। वीरभद्र के बेटे विक्रमादित्य को शिमला ग्रामीण से उतारने पर निर्णय सुरक्षित रख लिया।
59 प्रत्याशियों की पहली सूची से साफ संकेत मिले हैं कि कांग्रेस हाईकमान सियासी दंगल में अनुभवी नेताओं के दांव पेच पर भरोसा कर रहा है। विधायक नीरज की जगह उनके अनुभवी पिता चंद्र कुमार, देहरा से सांसद विप्लव को भाजपा के रविंद्र रवि से भिड़ाया जा रहा है। अस्वस्थ बताए जा रहे फतेहपुर विधायक और मंत्री सुजान सिंह पठानिया फिर चुनाव में उतरेंगे।
शिमला में अनुभवी हरभजन भज्जी का नाम इसी रणनीति के तहत शामिल हुआ। आने वाले नौ टिकटों में ठियोग और पालमपुर पर सबकी नजर है। दोनों सीटों पर सिटिंग विधायक विद्या स्टोक्स और बृज बिहारी लाल बुटेल रिटायरमेंट होने की तैयारी में थे, लेकिन अब उन पर चुनाव लड़ने का दबाव है।
परंपरागत फॉर्मेट को तोड़ा भाजपा ने
जिताऊ प्रत्याशियों की तलाश भाजपा में कई चेहरे पर आकर खत्म हुई। पुराने चेहरों को तरजीह से पुरानों के समर्थकों की बगावत की परवाह भी पार्टी नेतृत्व ने नहीं की। चयन के परंपरागत फॉर्मेट को दरकिनार कर नेतृत्व ने कांग्रेस से चेहरे लेने और चार सिटिंग विधायकों को बाहर किया गया। मंडी में अनिल शर्मा तो चंबा में पवन नैय्यर आए।
शिमला ग्रामीण और कसुम्पटी में आयतित किया गया। आंतरिक सर्वेक्षणों के अलावा भाजपा के पुराने कार्यकर्ताओं के लिए संघ की खूब सुनी गई। बंजार में खीमीराम की जगह सुरेंद्र शौरी तो झंडूता में विधायक रिखीराम की जगह आरएसएस की सिफारिश पर कटियाल को टिकट दिया गया।
लगभग एक दर्जन सीटों पर सोलन, बिलासपुर, अर्की, फतेहपुर, नगरोटा, जयसिंहपुर, डलहौजी, गगरेट, भोरंज में संघ की चली। चंबा में सिटिंग विधायक वीके चौहान इसलिए बाहर हुए कि कांग्रेसी पवन नैयर को लिया जा सके। दिग्गजों को नाराज करने से भी केंद्रीय नेतृत्व नहीं हिचका।
सांसद शांता कुमार के घर पालमपुर से इंदु गोस्वामी को मौका दे दिया, जबकि नेता प्रतिपक्ष धूमल को हमीरपुर से उठा सुजानपुर की नई सीट पर उतार दिया। सूत्रों की मानें तो इस रणनीति के पीछे कई वजहें हैं।
इसका बड़ा कारण यह है कि नए चेहरों को उतारने से एंटी इन्कम्बेंसी फैक्टर लगभग खत्म हो जाता है। हालांकि कुछ सीटों पर नाराजगी कम करने के लिए पार्टी को बैकफुट पर आना पड़ा है। धर्मशाला, इंदौरा, सुंदरनगर, जोगिंद्रनगर, शिमला में नए चेहरे देने की कसरत नहीं चल पाई।