'आई अचीवड द गोल। एल्पस पर तिरंगा फहराकर मुझे खुद पर नाज है। माता पिता की शुक्रगुजार हूं कि उन्होंने मुझे इस मुकाम तक पहुंचाया। टीम के सभी मेंबर्स को स्पॉन्सर मिल गए थे। लेकिन मुझे कोई स्पॉन्सर करने वाला नहीं मिला। मम्मी डैडी ने मेरी हौंसला अफजाई की। कहा, बेटी तेरे सपनों को कभी टूटने नहीं देंगे। उन्होंने लोन लेकर मुझे एल्पस फतह करने भेजा।'
ये अल्फाज हैं हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के सुल्याली गांव की आकृति हीर के। 20 वर्ष की उम्र में यूरोप की सबसे ऊंची और दुनिया की दूसरे नंबर की एल्पस चोटी को फतह कर आकृति न सिर्फ पहली, बल्कि देश की सबसे कम उम्र की पर्वतारोही भी बन गई हैं। नूरपुर के सुल्याली पंचायत की आकृति हीर ने यह कारनामा कर दिखाया है।
भारतीय समय के अनुसार वीरवार दोपहर करीब डेढ़ बजे आकृति ले एल्पस चोटी पर तिरंगा फहराया। इसके बाद उन्होंने सेटेलाइट से इसकी सूचना परिजनों को दी। आकृति की इस कामयाबी पर उनके पैतृक गांव सुल्याली में खुशी की लहर दौड़ गई है।