अधिकांश प्रावधानों का गरीब व्यक्ति से सीधा लेना-देना नहीं: जगत नेगी
वहीं राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि पटवारी के पास स्टांप ड्यूटी नहीं लगती। एफिडेविट के शुल्क में 100 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। विधेयक में किए गए अधिकांश प्रावधानों का गरीब व्यक्ति से सीधा लेना-देना नहीं है। ये मुख्य रूप से उन लोगों से संबंधित हैं, जो आयकर देते हैं। उन्होंने कहा कि एक करोड़ रुपये तक की संपत्ति पर महिलाओं के लिए स्टांप ड्यूटी चार फीसदी करने का भी विपक्ष विरोध कर रहा है। उन्होंने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा शासित राज्यों में भी शुल्क बढ़ाए गए हैं। केंद्र सरकार से पर्याप्त आर्थिक मदद नहीं मिल रही है, इसलिए राज्य को अपने संसाधन जुटाने पड़ रहे हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि इस संशोधन से गरीब आदमी को नहीं छेड़ा गया है।
महिलाओं को संपत्ति अधिकार दिलाने के लिए भी कदम उठाए: सीएम
विधेयक में स्टांप ड्यूटी और विभिन्न दस्तावेजों से संबंधित शुल्क में व्यापक बदलाव किए गए हैं। सरकार ने महिलाओं को संपत्ति खरीदने पर बड़ी राहत देते हुए स्टांप ड्यूटी आठ फीसदी से घटाकर चार फीसदी कर दी है। यानी महिला के नाम एक करोड़ रुपये की संपत्ति की रजिस्ट्री पर चार फीसदी स्टांप ड्यूटी देनी होगी। इससे पहले नेगी ने विधेयक में संशोधन का प्रस्ताव रखते हुए कहा कि हिमाचल में जीपीए (जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी) के नाम पर भ्रष्टाचार हो रहा है। प्रदेश से बाहर संपत्ति रखने वाले गैर-हिमाचलियों के लिए जीपीए पर स्टांप ड्यूटी बढ़ाई गई है। सीएम ने कहा कि सरकार ने महिलाओं को संपत्ति अधिकार दिलाने के लिए भी कदम उठाए हैं। उन्होंने सदन से विधेयक को ध्वनिमत से पारित करने का आग्रह किया।
त्रिलोक जम्वाल बोले, गरीब पर बढ़ेगा बोझ
भाजपा विधायक त्रिलोक जम्वाल ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि इसमें पूरे एक्ट में शुल्कों में बदलाव किया जा रहा है। कई शुल्क बहुत अधिक बढ़ा दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं को दी गई राहत केवल एक पहलू है, जबकि छोटे-छोटे प्रमाणपत्रों के शुल्क में भी भारी बढ़ोतरी की गई है। उन्होंने कहा कि गांव के गरीब व्यक्ति को संपत्ति के हर चरण में म्यूटेशन जैसे कार्यों के लिए शुल्क देना पड़ता है। जहां पहले 20 रुपये लगते थे, वहां अब 500 रुपये तक किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुल 49 संशोधन किए गए हैं और गरीब आदमी के लिए यह बोझ बढ़ाने वाला है। उन्होंने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि मुर्गी को अंडे देने वाली मुर्गी समझकर एक दिन में हलाल न करें।
युद्ध जागीर की राशि बढ़ाकर अब 12 हजार रुपये सालाना, विधेयक पारित
प्रदेश सरकार ने सैनिकों और युद्ध पुरस्कार विजेताओं को मिलने वाली युद्ध जागीर की राशि बढ़ाने के लिए हिमाचल प्रदेश युद्ध पुरस्कार (संशोधन) विधेयक 2026 विधानसभा में पारित कर दिया। स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता तथा सैनिक कल्याण मंत्री कर्नल डॉ. धनीराम शांडिल ने गुरुवार को इस संशोधन विधेयक को पारित करने का प्रस्ताव रखा। इसमें पात्र लाभार्थियों को दी जाने वाली वार्षिक युद्ध जागीर की राशि सात हजार रुपये से बढ़ाकर 10 हजार करने का प्रावधान किया गया है। मंत्री के अनुसार बढ़ती महंगाई और कीमतों में वृद्धि को देखते हुए राशि में संशोधन जरूरी हो गया था।