सेब ढुलाई भाड़े में दस फीसदी वृद्धि पर प्रदेश सेब उत्पादक संघ ने सवाल किए हैं। संघ का कहना है कि डीजल की कीमत स्थित है। बावजूद प्रशासन ने भाड़े की दरों में बढ़ोतरी कर बागवानों की कमर तोड़ दी है। संघ का तर्क है कि एक तो पहले से ही सेब की फसल कम है और राहत देने के बजाय मालभाड़ा बढ़ाकर प्रशासन ने बागवानों पर अधिक बोझ डाल दिया है।
संघ ने कड़ा विरोध करते हुए कहा कि अगर भाड़े की दरें न घटाई गई तो इसके खिलाफ धरने प्रदर्शन किए जाएंगे। बीते हर साल जिला प्रशासन सेब सीजन के दौरान सेब के मंडियों तक ढुलाई के लिए माल भाड़ा तय करता है और भाड़े में हर साल पांच प्रतिशत तक का इजाफा करता है लेकिन इस साल दस फीसदी भाड़े के बड़ने से सेब बागवानों पर बोझ बड़ गया है।
500 पेटी के साथ ट्रक का भाड़ा (दिल्ली तक)
क्षेत्र बीते साल इस साल
चौपाल 32500 35750
मतियाना 28500 31350
रामपुर 35500 39050
जुब्बल 33500 36850
कोटखाई 30000 33000
ठियोग 27500 30250
तुरंत वापस लिया जाए बढ़ा हुआ किराया: चौहान
फल एवं सब्जी उत्पादक संघ के अध्यक्ष हरीश चौहान का कहना है पेटियों का भाड़ा बढ़ा कर सरकार ने बागवानों पर गैर जरूरी बोझ डाल दिया है। बीते सालों की अपेक्षा इस साल डीजल के रेट कम हैं बावजूद इसके ढुलाई की दरें बढ़ा दी गई है। इस बार सेब की फसल कम है, ओलों से फसल बुरी तरह प्रभावित हुई है ऐसे में किराये की दरें घटाई जानी चाहिए थी। अगर सरकार 10 फीसदी बढ़ोतरी तुरंत वापिस नहीं लेती तो धरना प्रदर्शन कर रोष व्यक्त किया जाएगा।