प्रदेश सरकार की ओर से गठित उच्चस्तरीय कमेटी ने सोमवार से क्रशर घोटाले की जांच शुरू कर दी। पहले दिन 40 क्रशर संचालकों ने कमेटी के समक्ष अपना पक्ष रखा। कमेटी एक-एक कर सभी मामलों की जांच करेगी। निर्धारित मापदंड पूरे करने वाले क्रशर संचालकों को लेकर मूल्यांकन के बाद फैसला होगा।
उद्योग विभाग के निदेशक राकेश कुमार प्रजापति की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय कमेटी की पहली बैठक में पर्यावरण विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के निदेशक, लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधि, उद्योग विभाग के विधि अधिकारी और भू वैज्ञानिक मौजूद रहे। बरसात के दौरान ब्यास बेसिन में हुई भारी तबाही के बाद सरकार के आदेशों पर गठित कमेटी ने कुल्लू, मंडी, कांगड़ा व हमीरपुर जिलों के 130 क्रशरों की जांच की गई थी।
सरकार को सौंपी रिपोर्ट के आधार पर 47 क्रशरों को खोलने का निर्णय लिया गया था। हालांकि सरकार ने इसके बाद उच्च स्तरीय कमेटी गठित कर सभी क्रशरों की दोबारा जांच का निर्णय लिया। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने पूर्व भाजपा सरकार के समय बड़ी संख्या में बिना अनुमति के क्रशर चलने का आरोप लगाते हुए करीब 100 करोड़ रुपये के घोटाले की बात कही थी। कहा था कि ऐसे क्रशर भी हैं, जिनके पास पर्यावरणीय और विभागीय स्वीकृति नहीं है।