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हाईकोर्ट ने तकनीकी संस्थानों को दिया झटका

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बीटेक, एमटेक, बी फार्मा, एमसीए, एमबीए और एम फार्मा कोर्सों के लिए हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की रखी गई संयुक्त प्रवेश परीक्षा की शर्त को प्रदेश हाई कोर्ट ने सही ठहराया है।
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अदालत ने निजी तकनीकी संस्थानों की तरफ से दायर उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसके तहत इन संस्थानों ने 6 दिसंबर 2013 को प्रदेश विश्वविद्यालय के निर्देशों को चुनौती दी थी।

इन निर्देशों के अनुसार केवल उन्हीं छात्रों को दाखिला देने का प्रावधान बनाया गया था, जिन्होंने संयुक्त प्रवेश परीक्षा मेरिट में पास की हो।
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संस्‍थानों ने दी थी कोर्ट में चुनौती

निजी विश्वविद्यालयों ने एडमिशन के इन प्रावधानों को चुनौती दी थी कि इस तरह की शर्तों के कारण उनके संस्थानों में उत्तीर्ण छात्रों की कमी से उपरोक्त कोर्सों की सीटें खाली रह जाएंगी।

साथ ही संस्थान अपनी मर्जी से या किसी अन्य एजेंसी के माध्यम से किसी भी छात्र को दाखिला देने में असमर्थ रहेगी। निजी विश्वविद्यालयों ने अदालत के समक्ष दलील दी कि इस तरह के निर्देश प्रार्थी की स्वतंत्रता के खिलाफ है और सरासर मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

अदालत ने प्रार्थियों की इन दलीलों को नकारते हुए अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि सरकार का यह निर्णय मेधावी छात्रों को निजी संस्थानों में दाखिला देने के बारे में लिया गया है, जो निजी संस्थानों के स्टैंडर्ड बनाए रखने के लिए अति आवश्यक है। अदालत ने प्रार्थियों की गुहार को कानून के प्रावधानों के विपरीत पाते हुए याचिका को खारिज कर दिया है।
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