मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने जिला प्रशासन शिमला को आदेश दिए कि वे एनएचएआई की उक्त निर्माणों को हटाने में हर तरह से मदद करे।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अभी केवल उन्हीं निर्माणों को तोड़ा जाए, जिनके मुआवजे प्रभावितों को दे दिए गए हैं। जिन निर्माणों के मुआवजा संबंधित मामले लंबित हैं उन निर्माणों को न छेड़ा जाए।
प्रोजेक्ट संचालक की ओर से बताया गया कि फोरलेन का कार्य शुरू कर दिया गया है और तय समय के भीतर यानी 27 सितंबर 2020 तक यह प्रोजेक्ट पूरा कर लिया जाएगा।
कोर्ट ने अपने आदेशों में स्पष्ट किया कि इस प्रोजेक्ट पेड़ों को काटने के लिए हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी आदेशों का पालन किया जाए और उपरोक्त आदेशों की अनुपालना रिपोर्ट 24 जून तक कोर्ट के समक्ष पेश करे।