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शिक्षक भर्ती पर हाईकोर्ट को नहीं मिला संतोषजनक जवाब, तलब किए सचिव

Wed, 12 Sep 2018 09:53 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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प्रदेश के सरकारी स्कूलों में अध्यापकों की कमी के कारणों पर संतोषजनक उत्तर न देने पर हाईकोर्ट ने शिक्षा सचिव को एक बार फिर अदालत में पेश होने के आदेश दिए हैं।

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कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान शिक्षा सचिव से पूछा है कि शिक्षा विभाग में रिक्त पड़े सभी प्रकार के पदों को भरने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। वीरवार को मामले पर दोबारा सुनवाई होगी।

कोर्ट ने कहा कि शिक्षा सचिव का शपथ पत्र पिछले आदेशानुसार नहीं है। कोर्ट ने सरकार से जानकारी मांगी थी कि स्कूलों में हर विषय के अनुसार रिक्त पदों की कुल कितनी संख्या है। जिले के अनुसार कितने स्कूल हैं। 

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शपथ पत्र के माध्यम से न्यायालय के समक्ष रखने के आदेश

 हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग को कितने पद भरने के लिए भेजे गए हैं। कितने समय में खाली पड़े पदों को भरा जाएगा। कोर्ट ने इस बाबत जानकारी सचिव के शपथ पत्र के माध्यम से न्यायालय के समक्ष रखने के आदेश जारी किए हैं।

शिक्षा सचिव ने पिछले शपथपत्र में कहा था कि स्कूलों में अध्यापकों की कमी की एक वजह अदालतों में लंबित पड़े मामलों का होना भी है। इस पर कोर्ट ने यह भी पूछा था की वह कौन-कौन से मामले हैं जिनके कारण सरकार स्कूलों में रिक्त पड़े पदों को नहीं भर पा रही है।

शिक्षा सचिव के अनुसार प्राइमरी स्कूलों में 1754, अपर प्राइमरी स्कूलों में 2499 व सीएंडवी अध्यापकों जिनमें ओरल टीचर, भाषा अध्यापक, कला अध्यापक व शारीरिक शिक्षा अध्यापक आते हैं, के 5277 पद रिक्त पड़े हैं।

मामले में नियुक्त कोर्ट मित्र ने बताया है कि शिक्षा विभाग के लिए शिक्षकों की तनख्वाह देने को जारी कुल बजट का 23 प्रतिशत हिस्सा सरकार द्वारा पद न भरे जाने की वजह से लैप्स हो जाता है।

सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि मुख्यमंत्री को इस जनहित याचिका की जानकारी व समय-समय पर जारी कोर्ट के आदेशों से अवगत करवाया जाएगा।
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मुख्य सचिव को जल्द नियुक्तियां देने के निर्देश

कोर्ट ने अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष को भी व्यक्तिगत शपथ पत्र के माध्यम से यह बताने को कहा कि शिक्षकों के पदों को भरने के लिए कितने दिनों में चयन प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।

आयोग ने कोर्ट को बताया था कि भाषा अध्यापक के 122, ड्राइंग मास्टर के 77 व शास्त्री के 234 पदों को भरने के लिए सरकार को सिफारिश भेजी गई है। अब राज्य सरकार द्वारा इन पदों को भरने के लिए नियुक्ति दी जानी है।

हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को आदेश दिए हैं कि वह इस बाबत जल्द से जल्द जरूरी प्रक्रिया पूरी करें। कोर्ट मित्र ने न्यायालय को बताया कि शिक्षा सचिव द्वारा दायर किया गया शपथपत्र शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के मुताबिक नही हैं।

सरकार ने 9 जुलाई को 1331 व 1036 शिक्षकों के पदों को भरने के लिए कदम उठाए हैं। जबकि 14,354 पद अभी तक रिक्त पड़े हैं। कोर्ट मित्र ने न्यायालय को यह भी बताया कि सचिव न्यायालय को रिक्त पदों के बारे में स्पष्ट ब्यौरा देने में नाकाम रहे हैं। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप उठाए गए कदम नाकाफी हैं।
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