ये लोग प्रदेश सरकार से विधिवत दी गई स्वीकृति के बाद खनन गतिविधियां चला रहे थे। स्वीकृतियां जारी करने से पूर्व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से भी वांछित स्वीकृतियां विभिन्न सरकारी एजेंसियों से ली गई थी।
पर्यावरण स्वीकृति से संबंधित मामले जो राष्ट्रीय हरित अधिकरण के 4 मई, 2016 को पारित आदेशों के बाद अनिवार्य मामलों में मंत्रालय के पास निर्णय के लिए लंबित पड़े थे।
हालांकि संबंधित पक्षों ने इन मुद्दों को समय रहते मंत्रालय से उठाया था। मंत्री ने कहा कि पर्यावरण और वन मंत्रालय की ओर से पर्यावरण स्वीकृति रोकने से खनन गतिविधियां में बंद होने की स्थिति उत्पन्न हो रही है।
इसके परिणामस्वरूप क्षेत्र के बड़ी संख्या में लोगों के रोजगार का नुकसान हुआ है। इस कारण गरीबी, बेरोजगारी और गैर व्यवहार्य आर्थिक संसाधनों की उपलब्धता में कमी आई है।