सात जून, 2003 को तत्कालीन मुख्यमंत्री के ध्यान में मामला लाया गया। पुलिस अधीक्षक सतर्कता साउथ जोन शिमला के सपुर्द मामला करने के बाद जांच की गई। उप पुलिस अधीक्षक राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने जांच रिपोर्ट सौंपी। दो दिसंबर, 2016 को सरकार एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो सोलन के समक्ष सभी आरोपियों के खिलाफ भादंसं की धारा 420, 468, 471 व 120 बी व भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 13 (1)डी व 13 (2) के तहत मामला दर्ज किया गया।
जांच के बाद अंतिम रिपोर्ट 17 जुलाई 2013 को कोर्ट के समक्ष दाखिल की गई। अभियोजन पक्ष ने 7 सितंबर, 2018 को राजीव बिंदल व अन्य आरोपियों के खिलाफ मामला वापस लेने को विशेष जज सोलन के समक्ष आवेदन किया। स्पेशल जज सोलन ने 24 जनवरी, 2019 को अभियोजन पक्ष के आवेदन को स्वीकार करने के बाद राजीव बिंदल व अन्यों के खिलाफ मामला वापस लेने की अनुमति दी। इस फैसले को अर्की निवासी पवन ठाकुर ने हाईकोर्ट में याचिका के माध्यम से चुनौती दी। इसे न्यायाधीश सुरेश्वर ठाकुर ने मामले से जुड़े तमाम रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद खारिज कर दिया।