हाईकोर्ट ने अनुबंध अवधि को वरिष्ठता सहित अन्य सेवा लाभों के लिए गिने जाने संबंधित फैसले को लागू न करने से जुड़ी अवमानना याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। न्यायाधीश सुरेश्वर सिंह ठाकुर ने मामले पर सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
न्यायालय ने इंटरविनर की ओर से इस मामले में हस्तक्षेप करने वाले आवेदनों को भी खारिज कर दिया। नरेंद्र सिंह नायक के इस मामले में हाईकोर्ट द्वारा दिए गए निर्णय के अनुसार लोक निर्माण विभाग को आदेश दिए गए थे कि प्रार्थी की ओर से अनुबंध आधार पर दी गई सेवाओं को अन्य सेवा लाभों के साथ वरिष्ठता के लिए भी गिना जाए।
हाईकोर्ट की एकल पीठ के इस निर्णय के खिलाफ विभाग ने खंडपीठ के समक्ष अपील के माध्यम से चुनौती दी जिसे खंडपीठ ने खारिज कर दिया और एकल पीठ द्वारा दिए गए निर्णय पर अपनी मुहर लगा दी। इसके बाद विभाग ने खंडपीठ के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष चुनौती दी जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भी खारिज कर दिया।
प्रार्थियों के अनुसार अब राज्य सरकार और लोक निर्माण विभाग नरेंद्र नायक के मामले पर दिए गए निर्णय को लागू करने में आनाकानी कर रहे है। न्यायालय ने दोनों पक्षों की पूरी बहस सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।