औपनिवेशिक वास्तुकला की गौरवमयी शैली का प्रतिनिधित्व करती 1910 में बनाई गई टाउन हाल बिल्डिंग मरम्मत को तरस रही है। नगर निगम दफ्तर की इस बिल्डिंग की अधिकांश खिड़कियां टूट चुकी हैं। सीढ़ियां जर्जर हाल में है।
दीवारों पर घास जम गई है। खिड़कियों में शीशे लगाने की बजाय लोहे की शीट्स, गत्ते लगाए हैं। खिड़कियों की बीडिंग भी टूट चुकी है। उपमहापौर के दफ्तर को जाने वाली सीढ़ियां अंतिम सांसें गिन रही हैं।
महापौर संजय चौहान के कार्यालय समेत कई अन्य शाखाओं में पानी टपकता है। बिल्डिंग के जीर्णोद्धार का प्लान और बजट दोनों तैयार हैं लेकिन काम शुरू नहीं हो पा रहा है।